Satvik Aahar Ke Ke Bare Me
सात्विक खाना खाने से योगाभ्यास में अधिक लाभ होता है। राजसिक में तेल. नमक, मसाला अधिक होता है। इसके सेवन से विचलन बढ़ती है। जब आप ध्यान करने बैठते हैं, तो मन में कई विचार आते हैं। आसन करने के दौरान स्थिरता नहीं रहती। तामसिक भोजन में बासी या पुराना भोजन करने से तमस बढ़ता है। इससे आसन करने के दौरान जड़ता व आलस आती है। सात्विक आहार से संतुलन और उत्साह बना रहता है। ताजा भोजन, सलाद, फल आदि लेने से आसन करने के दौरान तन-मन में हल्कापन महसूस होता है और आसान करने में भी मजा आता है। मिताहार भी जरूरी है। यानी आहार कितना भी फायदेमंद क्यों न हो, उसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। ज्यादा खाने से लाभ नहीं होता।
एक नजर इधर भी
3 बार ही पूरे दिन भर में भोजन करें, चाहे जितनी भी भूख क्यों न लगी हो।
2 घंटे सोने से पहले करें रात का भोजन। इससे नींद अच्छी आती है। सुबह ताजगी महसूस होगी।
योगाभ्यास करने वालो के लिए
आप हर दिन योगाभ्यास करते हैं, लेकिन क्या आपको कुछ लाभ हो रहा है? अगर नहीं हो रहा, तो हो सकता है उसके पीछे आपका खानपान जिम्मेदार हो। प्रत्येक दिन एक घंटा योग कर लेने से बात नहीं बनेगी। योग का शरीर पर फायदा तभी होगा, जब खानपान भी उसी के अनुसार करेंगे। योग को दिनचर्या में शामिल करने पर क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए। कितना और कब खाना चाहिए यह जानना भी जरूरी है। अक्सर कहा जाता है, जैसा अन्न, वैसा मन' यानी आप जो भी खाते-पीते हैं, उसका सीधा असर शरीर और मस्तिष्क पर पड़ता है। इसी वजह से योगाचार्यों ने योग के दौरान खानपान से संबंधित कुछ खास नियनों को पालन करने पर जोर दिया है।
सात्विक हो आहार भोजन तीन भागों में बंटा है सात्विक, राजसिक और तामसिक। योगाभ्यास करते हैं, तो सात्विक आहार लेना सबसे अधिक लाभदायक होता है। इससे दिमाग और शारीरिक सेहत बेहतर बनी रहती है। यह प्लांट बेस्ड, ईकोफ्रेंडली और क्षारीय गुण वाला (ऐल्कलाइन) होता है।
सात्विक आहार है
सात्विक खाद्य पदार्थों में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स, अनाज आदि शामिल होते हैं। राजसिक भोजन गर्मी और अम्लीय बढ़ता है। मांस, अंडा, अचार, चाय व कॉफी आदि राजसिक हैं। तामसिक आहार आलस को बढ़ाता है। इसमें एल्कोहल, मीठे खाद्य पदार्थ, सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि शामिल हैं। योग करते हैं, तो बेहतर है कि आप सात्विक खानपान के तरीके का ही अनुसरण करें।
कच्चा सबसे अच्छा
योग में हर चीज प्राण (लाइफ फोर्स) से संबंधितहोता है। वह भोजन, जिसमें प्राण होता है, वे हमें शारीरिक और भावनात्मक ताकत देते हैं। जब आप खाना पकाते हैं, तब फाइबर. न्यूट्रिएंट्स और एन्जाइम्स काफी मात्रा में निकल जाते हैं। कैन्ड, फ्रोजन, माइक्रोवेव्ड या अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड भी ऐसे ही होते हैं। वहीं कच्चे खाद्य पदार्थ जैसे अंकुरित अनाज में सभी विटामिन्स और मिनरल्स मौजूद होते हैं। इसी वजह से इसे प्राकृतिक आहार कहा गया है। इसमें सभी एन्जाइम्स मौजूद होते हैं। एन्जाइम्स बीमारियों से लड़ने और पाचन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उपवास है जरूरी
योग के अनुसार, टॉक्सिन का शरीर में एकत्रित होना यानी बीमारियों को बढ़ावा देना। गलत खानपान की आदत, केमिकल एक्सपोजर, नकारात्मक भावनाओं का मन में आना आदि से दिमाग और शरीर के असंतुलन को बढ़ाता है। ऐसे में उपवास सबसे बढ़िया तरीका है, इनके बीच संतुलन बनाए रखने के लिए। कई तरीके से आप उपवास कर सकते हैं, जैसे पानी पीकर (वाटर फास्ट), फल खाकर (फ्रूट फास्ट) या फिर दिनमें एक-दो बार भोजन न करके। ऐसा करने के पीछे एक मुख्य कारण होता है, पाचन प्रणाली को आराम देना।
सुबह में नींबू-पानी
जब हम रात में सोते हैं, तो शरीर में टॉक्सिन और एसिड का निर्माण अधिक होता है। ऐसे में सुबह के समय खाली पेट एक गिलास नींबू-पानी पीकर देखें। खासकर के लोग जो योग करते हैं। यह क्षारीय (ऐल्कलाइन) होता है, जो शरीर को डिटॉक्सिफाई करके सभी अंगों को सक्रिय करने में मददगार होता है।
कम हो मात्रा
अच्छी सेहत और लंबी उम्र का सबसे बड़ा दुश्मन है अत्यधिक खाना (ओवरईटिंग)। योग करते हैं, तो अच्छा खाएं, ज्यादा नहीं। साथ ही हल्दी, अदरक, धनिया, काली मिर्च, दालचीनी, इलायची का सेवन भी करें। ये सभी एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटी-माइक्रोबियल और डिटॉक्सिफाइंग होते हैं। अश्वगंधा और त्रिफला का सेवन करने से तनाव कम होता है।
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