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पिंपल्स - muhase ka ilaj, muhase kaise Hataye ya Saaf Karane, Tarika, Vidhi, Illaj, Upchar, Chhutkara

चेहरे (फ़ेस) मुंहासे दाग धब्बे खत्म या दूर करने का तरीका, इलाज व उपचार छुटकारा? हामोस में असंतुलन, गलत जीवनशैली या कुछ अन्य कारणों से चेहरे पर एक्ने होना आम बात है, मगर इनको उचित देखभाल में नजर अंदाजी पोछे छोड़ जाती है इनके दाग, जो कर देते हैं चेहरा बेजान... मुंहासे क्यों होते हैं ? चेहरे पर मुंहासे होने का अर्थ है कि आपका शरीर यह संकेत दे रहा है कि आपकी दिनचर्या या खानपान की शैली में कुछ परिवर्तन करने की आवश्यकता है। इसके अलावा हामोस में आने वाले बदलाव भी इस प्रक्रिया को तेज कर देते हैं। इससे ज्यादा परेशानी का सबब बनते हैं एक्ने के बाद होने वाले दाग-धब्बे। ये दाग तब होते हैं, जब कोई मुंहासा त्वचा के भीतर गहराई तक पहुंच जाता है और भीतर के टिश्यू को नुकसान पहुंचाता है। इसीलिए हर प्रकार के दाग-धब्बे के उपचार का अलग असर होता है और कुछ उपचार अन्य के मुकाबले खास प्रकार के धब्बों पर ज्यादा प्रभावी होते है। इनका सही उपचार करवाकर ही इन्हें पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। जब शरीर में किसी चोट की वजह से अधिक मात्रा में कोलेजन बनने लगता है तो आइस पिक जैसे परेशान करने वाले स्कार्स बन सकत...

mirgi bimari ka ilaj | mirgi se chutkara kaise paye | mirgi ke jhatke ka ilaj | mirgi rog ka ilaaj | mirgi treatment in hindi

मिर्गी और उपचार के बारे मे जानकारी या मिर्गी बीमारी का इलाज क्या है? मिर्गी और उसके उपचार राष्ट्रीय मिर्गी दिवस (17 नवंबर) के लिए इस वर्ष की थीम रही 'आइए मिर्गी के बारे में बात करें।' जानते हैं इस बीमारी के आधुनिक उपचार के बारे में... मिर्गी हर आयु के बच्चों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि यह एक सामान्य विकार है, जो संपूर्ण जनसंख्या के एक फीसद बच्चों में पाया जाता है। अभी भी मिर्गी के बारे में बहुत सारे मिथक बने हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप बच्चों को उचित उपचार नहीं मिल पाता है। बच्चों में मिर्गी प्रमुख रूप से एक वर्ष की आयु तथा किशोरावस्था में दिखाई देने वाली बीमारी है। बचपन में मिर्गी के दौरे विभिन्न प्रकार के होते हैं। जिसमें कुछ लक्षण न दिखाई देने वाले तथा कुछ में कंपकपाहट व सिहरन की समस्या हो सकती है। भारत में इसके होने के दो प्रमुख कारण हैं, जिनमें एक आनुवांशिक व दूसरा मस्तिष्क की चोट होता है। इस बीमारी के बारे में आज भी जागरूकता का अभाव है। इसका बुरा पहलू यह है कि आज भी इसके रोगी को लोग उपेक्षा की नजर से देखते हैं, जबकि अब तो दवाओं के साथ ही मिर्गी की सर्जरी का विकल्प...

corona hone ke bad ke lakshan | covid ke baad ke lakshan | corona hone ke bad side effects | corona theek hone ke bad

Corona Se Thik Hone Ke Baad Side Effects Or Corona Virus Ke Baad Hone Wali Bimari  Corona Thik Hone Ke Baad Ke Lakshan   कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद लोगों को कमजोरी, सांस फूलना, पैरों में सूजन, थकान और नींद न आने की समस्या हो रही है। दो से तीन माह में ये लक्षण समाप्त हो जाते हैं लेकिन अगर इस तरह की परेशानी बनी रहे तो चिकित्सकीय परामर्श जरूर लें... कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोगों को कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। इनमें सबसे आम है थकान, कमजोरी और नींद नहीं आना। लोगों में कोरोना संक्रमण से उबरने के दो से तीन महीने तक इस तरह की तकलीफ देखने को मिल रही है। हालांकि पहली लहर की अपेक्षा दूसरी लहर में इस तरह के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। संक्रमित होने के बाद जिन लोगों को इस तरह की परेशानी हो रही है, वे घबराएं नहीं, क्योंकि अधिसंख्य मामलों में धीरे-धीरे इस तरह की परेशानी अपने आप ही समाप्त हो जाती है। ऐसे लोगों को चाहिए कि वे पोषक आहार लें, हल्का व्यायाम और योग करें। हां, सतर्कता रखना बेहद जरूरी है। यदि कुछ भी असामान्य लगता है। चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। इसके ...

corona janch kab karna chahiye | corona janch type | corona janch kaise kare | corona ki janch kaise karaye aur kaise pata kare

कोरोना की जांच कैसे होगी या कोरोना की जांच कब करनी चाहिए कोविड या पोस्ट कोविड मरीजों के आंतरिक अंगों की क्या स्थिति है? सूजन या रक्त साव का खतरा तो नहीं  है? ब्लॉकेज अथवा स्ट्रोक का खतरा तो नहीं है?क्या कोविड का उपचार पा रहे मरीजों की समय रहते जरुरी जांचें कराई जार ही हैं? ऐसे कई सवाल जुड़े हैं कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की सेहत के साथ। जानें देश के बड़े अस्पतालों और विशेषज्ञों के हिसाब से क्या है जमीनी स्थिति...  कोरोना की जांच क्यू जरूरी है? अगर आप पहले से संक्रमण के दायरे मे है तो,,, इंदौर निवासी 32 वर्षीय रोहित जैन (परिवर्तित नाम) कोरोना संक्रमित पाए गए। आठ दिन अस्पताल में भर्ती रहे। अगली रिपोर्ट नेगेटिव आई। डिस्चार्ज होकर घर लौटे ही थे कि हालत फिर बिगड़ने लगी। दोबारा अस्पताल ले जाकर जांच कराई तो छाती का सीटी स्कैन कराने पर पता चला कि फेफड़े में बहुत संक्रमण है। दो दिन में उनकी मौत हो गई। ऐसे अनेक मामले सामने आ रहे हैं, जहां स्थिति का समय पर व सटीक अनुमान नहीं लगा पाने के कारण देर हो गई। समय रहते निदान और उपचार इससे बचने का एकमात्र उपाय है। भारी न पड़ जाए ला...

prp therapy for hair in hindi | prp therapy kya hai | platelet rich plasma in hindi

प्लेटलेट रिच प्लाज्मा थेरेपी के बारे मे इन हिन्दी या पीआरपी थेरेपी क्या होता है ? बालों से संबंधित समस्याओं में कारगर है प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा थेरेपी। इसे आजमाकर लौटाई जा सकती है बालों की बसूरती... आजकल लोग बालों से संबंधित कई समस्याओं से परेशान रहते हैं। गंजापन, बाल झड़ना, बालों का अत्यधिक महीन हो जाना बालों से संबंधित सबसे सामान्य समस्याएं हैं। अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो पीआरपी थेरेपी आजमा सकते हैं। इसमें किसी बाहरी या कृत्रिम चीज का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बल्कि इसमें इस्तेमाल होने वाले प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा (पीआरपी) को उपचार कराने वाले व्यक्ति के रक्त से ही तैयार किया जाता है। कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्राकृतिक रूप से बालों का विकास होता है। यह जानने के लिए कि वास्तव में यह तकनीक बालों को उगाने में कितनी कारगर है, इस पर अभी भी शोध जारी हैं। ये है पीआरपी थेरेपी: पीआरपी थेरेपी एक बायोलॉजिकल उपचार है। इसमें जिस व्यक्ति का उपचार किया जाता है, उसके रक्त को ही प्रोसेस करके प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा यानी पीआरपी तैयार ...

interstitial lung disease in hindi | interstitial lung disease kya hai | treatment | symptoms

Interstitial Lung Disease  (इंटरस्टीशियल लंग डिजीज) इंटरस्टीशियल लंग डिजीज, लक्षण, उपचार इन हिन्दी या इंटरस्टीशियल लंग क्या होता है?  कई बीमारियों का समूह है इंटरस्टीशियल लंग डिजीज। उपचार और आहार-विहार को अपनाकर पाया जा सकता है इसमें नियंत्रण... इंटरस्टीशियल लंग डिजीज (आई.एल.डी.) दो सौ से अधिक रोगों के समूह को नाम दिया गया है, क्योंकि यह सभी क्लिनिकल, रेडियोलॉजिकल और पैथोलॉजिकल विशेषताओं को साझा करती हैं। इंटरस्टीशियल लंग डिजीज में थकावट, सूखी खांसी और सांस फूलने जैसे लक्षण पाए जाते हैं। इसमें चेस्ट एक्सरे में फेफड़े में धब्बे तथा लंग फंक्शन टेस्ट में फेफड़े की कार्य क्षमता कम दिखाई देती है। इंटरस्टीशियल लंग डिजीज के निदान में मरीज के लक्षणों की जानकारी, शारीरिक परीक्षण, चेस्ट एक्सरे, सीटी स्कैन तथा फेफड़ों की कार्य क्षमता देखी जाती है। दो भागों में बंटी होती हैं बीमारियां: इंटरस्टीशियल लंग डिजीज़ को दो भागों में बांटा गया है। एक वे, जिनमें कोई न कोई कारण का पता चलता है (जैसे पर्यावरणीय एवं औद्योगिक प्रदूषण, ऊतक रोग आदि) और दूसरा जिसमें विस्तारपूर्वक जांच के बाद ...

rashes kaise thik kare | rashes ka ilaj in hindi | rashes ka gharelu ilaj | rashes home treatment

स्किन रैशेज की समस्या का घरेलु उपचार इलाज और जांघों Rashes को ठीक करने के उपाय या स्किन रैशेज ट्रीटमेंट इन हिंदी  जांघो के बीच में होने वाले रैशेज गर्मी के मौसम की सबसे आम परेशानियो में से एक है। कैसे घरेलू उपायों की मदद से इस परेशानी से कैसे छुटकारा पाए। गार्मियों का मौसम आया नहीं कि महिलाओं में त्वचा संबंधी सौ परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इन परेशानियों की एक प्रमुख वजह है, पसीना। परेशान करने वाली गर्मी के बीच शरीर से लगातार बहता पसीना चिपचिपा और बदबूदार तो होता ही है, साथ ही इससे कई तरहके  फंगल इंफेक्शन भी हो जाते हैं। खासतौर से महिलाओं की जांघों के बीच रैशेज होना गर्मी के मौसम की एक आम समस्या है। जिन महिलाओं या युवतियों की जांघे सामान्य से थोड़ी भारी होती हैं, उन्हें तो और ज्यादा परेशानी होती है। ऐसे में रह-रहकर होने वाली खुजली से असहजता और बढ़ जाती है। बार-बार खुजाते रहने से त्वचा छिल जाती है और खरोंच के निशान तक पड़ जाते हैं, जो सूखने के बाद और ज्यादा दर्द पैदा करते हैं।कई बार स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि चलने और उठने-बैठने तक में बहुत दिक्कत होने लगती है। क्या कहते हैं...

jod dard ka tel | jodo ka dard oil | joint pain ointment | joint pain (Jod Dard) ki dawa

जोड़ों का दर्द की दवा या जोड़ों के दर्द तेल जोड़ों के दर्द से आपको दवाओं से कुछ दिनों के लिए आराम मिल सकता है, लेकिन दवा का प्रभाव खत्म होते ही आपको दोबारा दर्द का सामना करना पड़ेगा। पर 'अरोमा ऑयल्स' के जरिए आपको इससे लंबे समय के लिए फायदा मिल सकता है। इन तेलों का उचित प्रकार से प्रयोग करें। जोड़ों के दर्द में अरोमाथेरेपी फायदेमंद होती है। इन प्राकृतिक तेलों की खुशबू का प्रभाव सीधे हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है। यह प्रभावित हिस्से के रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं और सूजन कम करते हैं। कायेन पेपर ऑयल: इसकी कुछ बूंदों को नारियल तेल के साथ मिलाएं। तेल का प्रयोग दिन में दो से तीन बार करें। दो से तीन हफ्ते लगातार इस्तेमाल से फायदा होगा। लेमनग्रास ऑयलः राहत पाने के लिए इस ऑयल को अलग-अलग तरीकों से प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए पानी को उबालकर उसमें कुछ बूंदें लेमनग्रास तेल की डालें और प्रभावित हिस्से में भाप लें। इससे आपको काफी राहत मिलेगी। लोबान तेलः इस तेल को ऑलिव ऑयल के साथ मिलाकर सूजन वाले हिस्से में लगाएं। इससे सूजन कम होगी। पिपरमेंट ऑयलः तेल की पांच स...