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रेडियो फ्रीक्वेंसी न्यूरोटॉमी क्या है - Radiofrequency Neurotomy Kya Hota Hai | Spinal Pain Treatment In Hindi

Radio Frequency Neurotomy Treatment Ke Bare Me Janakari लंबे समय से रीढ़ के दर्द से जूझते मरीजों के लिए आशा की किरण है रेडियो फ्रीक्वेंसी न्यूरोटॉमी। इससे पुराने दर्द और रीढ़ की कई तकलीफों में मिल जाती है राहत............ रेडियो फ्रीक्वेंसी न्यूरोटॉमी क्या है? व्यस्त जीवनशैली और एक्सरसाइज की कमी के चलते स्वास्थ्य को लेकर हम काफी हद तक लापरवाह हो चुके हैं। ऐसे में रीढ़ और मांसपेशियों से जुड़ी तकलीफों से दो-चार होने वाले मरीजों की संख्या बहुत  तेजी से बढ़ रही है। आज अधिकतर लोग ऑस्टियो अर्थराइटिस, रुमेटॉइड अर्थराइटिस, सर्वाइकल, स्पाइनल स्टेनोसिस से ग्रस्त हैं। इसके अलावा बढ़ती उम्र या चोट के कारण कार्टिलेज घिसने लग जाता है, जिससे जोड़ों  में सूजन आ जाती है। यह अर्थराइटिस की शुरुआत होती है। ज्यादातर रीढ़ की हड्डी की तकलीफ जैसे-ऑस्टियो अर्थराइटिस, स्पाइनल स्टेनोसिस या पीठ की कोई गहरी चोट  आदि फैसेट ज्वाइंट में दर्द का मुख्य कारण  होती हैं। आमतौर पर इनके प्राथमिक उपचार में  मरीज के दर्द के हिसाब से फिजियोथेरेपी, दर्द  निवारक दवा या पारंपरिक सर्जरी का इस्तेमाल...

corona hone ke bad ke lakshan | covid ke baad ke lakshan | corona hone ke bad side effects | corona theek hone ke bad

Corona Se Thik Hone Ke Baad Side Effects Or Corona Virus Ke Baad Hone Wali Bimari  Corona Thik Hone Ke Baad Ke Lakshan   कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद लोगों को कमजोरी, सांस फूलना, पैरों में सूजन, थकान और नींद न आने की समस्या हो रही है। दो से तीन माह में ये लक्षण समाप्त हो जाते हैं लेकिन अगर इस तरह की परेशानी बनी रहे तो चिकित्सकीय परामर्श जरूर लें... कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोगों को कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। इनमें सबसे आम है थकान, कमजोरी और नींद नहीं आना। लोगों में कोरोना संक्रमण से उबरने के दो से तीन महीने तक इस तरह की तकलीफ देखने को मिल रही है। हालांकि पहली लहर की अपेक्षा दूसरी लहर में इस तरह के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। संक्रमित होने के बाद जिन लोगों को इस तरह की परेशानी हो रही है, वे घबराएं नहीं, क्योंकि अधिसंख्य मामलों में धीरे-धीरे इस तरह की परेशानी अपने आप ही समाप्त हो जाती है। ऐसे लोगों को चाहिए कि वे पोषक आहार लें, हल्का व्यायाम और योग करें। हां, सतर्कता रखना बेहद जरूरी है। यदि कुछ भी असामान्य लगता है। चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। इसके ...

कोरोना फेफड़ों पर प्रभाव | कोरोना फेफड़ों में संक्रमण | कोरोना में फेफड़ों के संक्रमण वायरस | कोरोना में फेफड़ों समस्या वायरस | कोरोना वायरस फेफड़ों पर प्रभाव

कोरोना का फेफड़ों पर असर या प्रभाव और कोरोना वायरस फेफड़ों के संक्रमण के लक्षणों और उससे कैसे बचे के बारे मे जानकारी हिन्दी में कोरोना व धूम्रपान धूमपान और तंबाकू का सेवन एक साथ कई बीमारियों को दावत देता है। ये न केवल इसके शौकीनों की सेहत खराब करते हैं, बल्कि आसपास के लोग भी इससे प्रभावित होते हैं। कोरोना संक्रमण के प्रसार में भी इनकी अहम भूमिका है और ऐसे लोगों के कोरोना संक्रमित होने पर अन्यकी अपेक्षा जोखिम भी बढ़ जाता है...      जनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड इन सर्विसेज के अनुसार भारत में लगभग 27 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। भारत में तंबाकू के कारण प्रतिवर्ष लगभग 12 लाख लोगों की मृत्यु होती है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के अनुसार भारत में तंबाकू सेवन प्रारंभ करने की औसत आयु 18.7 वर्ष है। महिलाओं की तुलना में पुरुष कम उम्र में तंबाकू का सेवन करना प्रारंभ कर देते हैं। आज अधिकांश बीमारियों के पीछे तंबाकू की लत एक बड़ी वजह है। तंबाकू के कारण 25 तरह की बीमारियां तथा लगभग 40 तरह के कैंसर हो सकते हैं, जिसमें प्रमुख हैं- मुंह, गले, फेफड़े, प्रोस्टेट, पेट और ब्रेन का कैंसर...

delta variant kya hai | delta variant ke lakshan kya hai | corona dusari lahar ke lakshan

डेल्टा वेरिएंट क्या है और डेल्टा वैरीअंट के लक्षण(Symptoms) व बचाव(Treatment) के बारे मे  कोरोना की दूसरी लहर नियंत्रण में है,लेकिन तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। इसी के साथ इन दिनों डेल्टावैरिएंट को लेकर भी चर्चा तेज है। इसकी तीव्रता को देखते हुए जरूरी है कि संक्रमण से बचने के सारे उपाय अपनाएं जाएं और ज्यादा से ज्यादा हो वैक्सीनेशन... डेल्टा वेरीअंट क्या होता है? हमारे देश में कोरोना की दूसरी लहर पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, जो पिछले साल शुरू हुई पहली लहर की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक थी। अब कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ सितंबर-अक्टूबर में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जता रहे हैं। दूसरी तरफ दस्तक दे रहा है इसका डेल्टा वैरिएंट, जिसकी तीव्रता काफी अधिक है। इन सबको देखते हुए हमें पहले से ही तैयारियां करनी चाहिए। तीसरी लहर की आशंका और इसके छोटे आयुवर्ग पर प्रभाव के कयासों के बीच नेशनल कमीशन फार प्रोटेक्शन आफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) ने कहा है कि अगर कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है और इससे बच्चों के प्रभावित होने का कुछ भी अनुमान ह...

dhumrapan ke nuksan | dhumrapan hanikarak hai kaise | dhumrapan se hone wale nuksan | dhumrapan se hone wale rog

 धूम्रपान के नुकसान या धूम्रपान जीवन के लिए घातक और धूम्रपान से होने वाली हानियां घूमपान से स्वयं की ही नहीं आसपास के लोगों की भी सेहत प्रभावित होती है। इसका दुष्प्रभाव दिल व फेफड़ों पर पड़ने के साथ ही हड्डियों में कई तरह की समस्याएं पैदा करता है। नए शोधों के मुताबिक 80 फीसद बीमारियों की वजह होता है धूमपान... आजकल धूमपान का शौक बहुत बढ़ा है। हर उम्र के लोग इसकी गिरफ्त में तेजी से आ रहे हैं। तंबाकू का उपयोग पीने,खाने और मंजन के रूप में हो रहा है। तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभाव प्रायः सभी को पता हैं, किंतु युवावस्था की यह लत एक बार लगने के बाद बुढ़ापे तक बनी रहती है मगर एक बात यह भी है कि तंबाकू के सेवन से हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा उनमें रक्त संचार की कमी, संक्रमण, क्षरण एवं ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। जो लोग धूमपान करते हैं वे अपने लिए कई बीमारियों को दावत देने के साथ संपर्क में आने वालों को भी बीमार करते हैं। निकोटिन युक्त पदार्थों का सेवन टूटी हुई हड्डी के न जुड़ने या विलंब से जुड़ने का भी एक कारण है। धूमपान करने से शरीर क...

interstitial lung disease in hindi | interstitial lung disease kya hai | treatment | symptoms

Interstitial Lung Disease  (इंटरस्टीशियल लंग डिजीज) इंटरस्टीशियल लंग डिजीज, लक्षण, उपचार इन हिन्दी या इंटरस्टीशियल लंग क्या होता है?  कई बीमारियों का समूह है इंटरस्टीशियल लंग डिजीज। उपचार और आहार-विहार को अपनाकर पाया जा सकता है इसमें नियंत्रण... इंटरस्टीशियल लंग डिजीज (आई.एल.डी.) दो सौ से अधिक रोगों के समूह को नाम दिया गया है, क्योंकि यह सभी क्लिनिकल, रेडियोलॉजिकल और पैथोलॉजिकल विशेषताओं को साझा करती हैं। इंटरस्टीशियल लंग डिजीज में थकावट, सूखी खांसी और सांस फूलने जैसे लक्षण पाए जाते हैं। इसमें चेस्ट एक्सरे में फेफड़े में धब्बे तथा लंग फंक्शन टेस्ट में फेफड़े की कार्य क्षमता कम दिखाई देती है। इंटरस्टीशियल लंग डिजीज के निदान में मरीज के लक्षणों की जानकारी, शारीरिक परीक्षण, चेस्ट एक्सरे, सीटी स्कैन तथा फेफड़ों की कार्य क्षमता देखी जाती है। दो भागों में बंटी होती हैं बीमारियां: इंटरस्टीशियल लंग डिजीज़ को दो भागों में बांटा गया है। एक वे, जिनमें कोई न कोई कारण का पता चलता है (जैसे पर्यावरणीय एवं औद्योगिक प्रदूषण, ऊतक रोग आदि) और दूसरा जिसमें विस्तारपूर्वक जांच के बाद ...

jod dard ka tel | jodo ka dard oil | joint pain ointment | joint pain (Jod Dard) ki dawa

जोड़ों का दर्द की दवा या जोड़ों के दर्द तेल जोड़ों के दर्द से आपको दवाओं से कुछ दिनों के लिए आराम मिल सकता है, लेकिन दवा का प्रभाव खत्म होते ही आपको दोबारा दर्द का सामना करना पड़ेगा। पर 'अरोमा ऑयल्स' के जरिए आपको इससे लंबे समय के लिए फायदा मिल सकता है। इन तेलों का उचित प्रकार से प्रयोग करें। जोड़ों के दर्द में अरोमाथेरेपी फायदेमंद होती है। इन प्राकृतिक तेलों की खुशबू का प्रभाव सीधे हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है। यह प्रभावित हिस्से के रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं और सूजन कम करते हैं। कायेन पेपर ऑयल: इसकी कुछ बूंदों को नारियल तेल के साथ मिलाएं। तेल का प्रयोग दिन में दो से तीन बार करें। दो से तीन हफ्ते लगातार इस्तेमाल से फायदा होगा। लेमनग्रास ऑयलः राहत पाने के लिए इस ऑयल को अलग-अलग तरीकों से प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए पानी को उबालकर उसमें कुछ बूंदें लेमनग्रास तेल की डालें और प्रभावित हिस्से में भाप लें। इससे आपको काफी राहत मिलेगी। लोबान तेलः इस तेल को ऑलिव ऑयल के साथ मिलाकर सूजन वाले हिस्से में लगाएं। इससे सूजन कम होगी। पिपरमेंट ऑयलः तेल की पांच स...

Toxic Personality Disorder Kya Hain? Toxic Personality Disorder Lakshan, Prakar, Ilaj Ke Bare Me Janakari In Hindi Mein

Toxic Personality Disorder Ke Bare Me Jankari Toxic Personality Disorder Kya Hain? जब भी बोलें, कड़वी बात ही मुंह से निकले। बात-बात में ताने और नजरो से उपहास उड़ाने वाले लोग आसपास मिल ही जाते हैं। इसे ही toxic personality disorder कहते है। मनोवैज्ञानिक कहते हैं, "ऐसे 'टॉक्सिक पर्सनालिटी' से बचकर रहना बेहतर।" वैसे ऐसे लोगों का इलाज भी संभव है।  कई लोग बातचीत में जहर उगलते हैं और यह उनकी आदत में शुमार हो जाता है। मनोवैज्ञानिक कहते हैं यह एक ऐसी बीमारी है, जो व्यक्तित्व को नकारात्मक बनाती है। जैसे किसी भी इंसान का एक दूसरे इंसान से जुड़ाव और अलगाव उसकी शख्सियत या व्यक्तित्व तय करता है। एक इंसान किसी के लिए अच्छा हो सकता है तो वही इंसान किसी के लिए बेहद खराब भी हो सकता है, लेकिन इन सभी के बीच एक ऐसा व्यक्तित्व भी होता है जो सभी के लिए परेशानी का सबब होता है। इस तरह के व्यक्तित्व के स्वामी टॉक्सिक, विषाक्त या जहरीला कहा जाता है। जिस तरह से सांप की फितरत हर स्थिति में जहर उगलने की ही होती है उसी तरह टॉक्सिक पर्सनालिटी अपने आसपास के लोगों और माहौल में नकारात्मकता का संचार कर...