नींद में आपकी खुशी, कार्यकुशलता और सेहत छुपी हुई है। इस नींद के बारे में कितना जानते हैं आप?
कोई कहता है रात में छह-सात घंटे की नींद लेना काफी है। तो कुछ लोग दिन में देर तक सोने की बात को सही मानते हैं। एक अध्ययन की मानें तो थोड़े-थोड़े अंतराल में सोना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। यदि आप घर में काम कर रहे हैं, तो बीच-बीच में आधे घंटे नींद की झपकी लें। इससे प्रोडक्टिविटी, सतर्कता और साइको-मोटर एबिलिटी बढ़ती है। दिन में थोड़े-थोड़े अंतराल में सोने से मन प्रसन्न रहता है। अधिकांश शोधों में पाया गया है कि दिन में छह-सात घंटे काम करने के बाद 20 से 30 मिनट सोने के कई स्वास्थ्य लाभ हैं। आज लोगों की जीवनशैली जिस तरह की है, उसमें अधिकतर लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में दिन के समय थोड़े-थोड़े अंतराल में सोना फायदेमंद साबित हो सकता है। रात में देर से सोना, नींद पूरी न होने से दिन भर थकान और आलस महसूस होता है। कई शोधों में यह बात सामने आती रही है कि दिन में तीन से चार घंटे की नींद लाभदायक होती है, पर हाल ही में किया गया एक अध्ययन कुछ और ही कहता है। सारे दिन काम के बाद की थकान को दूर करने के लिए अगर तीस मिनट की नींद आप लें, तो बाकी का बचा हुआ दिन बेहतर बीत सकता है। स्कॉटलैंड में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, इस तरह की छोटी-छोटी अवधि में ली गई नींद सेहतमंद रहने के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है। छोटे अंतराल की नींद से एकाग्रता और स्फूर्ति बढ़ती है, यह पहले कई अध्ययनों में साबित हो चुका है, लेकिन इस बार किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इस प्रसन्नता या खुशी से जोड़कर देता है। अध्ययन में पाया गया है कि इस तरह की नींद से आप प्रसन्नचित भी रह सकते हैं। छोटे समय की नींद के बाद के असर को शोधकर्ताओं ने शब्द 'हैप्पीनेस के साथ जोड़कर 'नैप्पीनेस' का नाम दिया है। नैप का हिन्दी में मतलब छोटी अवधि की नींद होता है। यह अध्ययन इडेनबर्ग इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के लिए किया गया, जहां पर इस तरह से सोने वालों को शोधकर्ताओं ने नैपर्स का नाम दिया। और नैपर्स के अनुभवों को प्रसन्नता के मानकों पर आंका। हर्टफोर्डशायर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड वाइजमैन कहते हैं कि बेशक इससे पहले के अध्ययनों में देखा गया है कि तीस मिनट से कम की नींद आपको ज्यादा एकाग्र और क्रिएटिव बनाता है, पर इस अध्ययन के अनुसार यह भी सम्भावना है कि आप पहले से ज्यादा खुश रहेंगे। साथ ही वह लंबे समय तक सोने के स्वास्थ्य पर दुष्परिणामों के बारे में भी बताते हैं। दो साल पहले टोक्यो में किए गए अध्ययन में सामने आया था कि दिन में ज्यादा देर तक सोने वालों को टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है। इस अध्ययन को ऑनलाइन एक हजार से ज्यादा प्रतिभागियों पर किया । इन प्रतिभागियों से उनकी सोने की आदतों के बारे में मनोवैज्ञानिक सवाल पूछे गए। प्रतिभागियों के जवाबों के आधार पर उन्हें प्रसन्नता के मानकों पर आंका गया। सामने आए आंकड़ों के अनुसार, दिन में थोड़े समय के लिए सोने वालों का स्कोर औसतन 5 में से 3.67 था। वहीं दिन में न सोने वालों या लंबे समय तक सोने वालों का स्कोर औसतन 3.52 और 3.44 के बीच रहा। शोध में यह भी पाया गया कि वे लोग खुद को उन लोगों की तुलना में ज्यादा स्वस्थ महसूस करते हैं, जो दिन में कम अंतराल में बीस या तीस मिनट सोते हैं। अध्ययन के निष्कर्ष में छोटी-छोटी अवधि में सोने वाले 66 प्रतिशत लोग खुश पाए गए। 56 प्रतिशत वैसे लोग जो दिन में छोटी-छोटी अवधि में नहीं सोते, वे प्रसन्न और तरोताजा महसूस नहीं करते हैं। ऑफिस में सोना संभव नहीं। ऐसे में वे लोग जो सुबह की शिफ्ट में काम करते हैं, वे ऑफिस से घर पहुंचकर आधा घंटा सो सकते हैं। इससे आपका बाकी बचा दिन का समय प्रसन्न तरीके से बीतेगा। दफ्तर का तनाव भूलकर हल्का महसूस करेंगे।
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