ब्रेन स्ट्रोक के घरेलू उपाय या स्ट्रोक रोकने, स्ट्रोक से बचने के उपाय
स्ट्रोक का एक बहुत बड़ा कारण तनाव यानी स्ट्रेस ही है। आवाज में लड़खड़ाहट, एक तरफ मुह टेढ़ा हो जाना, हाथ या पैर में आकस्मिक कमजोरी आदि स्ट्रोक पड़ने के लक्षण है।
तनाव भरी जिंदगी में अन्य बीमारियों
की तरह लकवा भी आम इंसान को
अपनी गिरफ्त में ले लेता है। डॉक्टरों
के अनुसार, जब हमारे मस्तिष्क के
किसी हिस्से में खून ठीक से नहीं
पहुंचता, चाहे उसका कारण कुछ भी
हो, तो उस हिस्से की सूक्ष्म कोशिकाएं
मृत हो जाती हैं। इन कोशिकाओं के
काम बंद करने से शरीर का एक
हिस्सा लकवे का शिकार हो जाता है।
स्ट्रोक से दिमाग को होने वाले
नुकसान की भरपाई यानी
मृत
ब्रेन
सेल्स को दोबारा जीवित करना तो
असंभव है। हालांकि, यदि इसका
समय रहते इलाज किया जाए तो नर्व
सेल्स के मृत होने की प्रक्रिया
पर काफी हद तक काबू जरूर
पाया जा सकता है। लकवे के
इलाज के बारे में कम जानकारी
के कारण लोग बहुत तरह के
असामान्य या अवैज्ञानिक
तरीकों से इलाज करने लगते
हैं। यह ठीक नहीं है।
सवाल सही समय पर सही इलाज का है....
ब्लड प्रेशर और तनाव की वजह से कइयों को
इसका अटैक पड़ता है। "स्ट्रोक से होने वाला
दुष्प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है
कि ब्रेन के कितने बड़े हिस्से को
नुकसान पहुंचा है। हमारे मस्तिष्क के
दो भाग होते है-दायां एवं बायां।
मस्तिष्क का दायां भाग हमारे शरीर
के बाएं हिस्से को नियंत्रित करता है
अथवा बायां भाग हमारे दाएं हिस्से
को। यदि किसी मरीज के दाएं
मस्तिष्क में ब्रेन स्ट्रोक हो जाए तो
उसका बायां शरीर लकवा ग्रस्त हो
जाता है और बाएं मस्तिष्क में ब्रेन
स्ट्रोक हो तो मरीज के शरीर का दायां
भाग लकवा ग्रस्त हो जाता है।
न्यूरो फिजियोथेरेपी चिकित्सक, मरीज
के लकवा ग्रस्त हिस्से को विभिन्न
प्रकार की एक्सरसाइज और
मशीनी उपकरणों द्वारा पूरे दिन
में कम से कम 4 से 6 घंटों
तक उपचार करते है, जिससे
मरीज पुनः अपने लकवा और
पैरालिसिस वाले भाग को ठीक
कर पाता है ! ब्रेन स्ट्रोक के
बाद पहले 4 से 6 महीने मरीज
के लिए बहुत उपयोगी होते हैं
और मरीज अगर सही फिजियोथेरेपी चिकित्सा का लाभ ले, तो 99 फीसदी तक पहले की भांति सामान्य हो सकता है।
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें
Thanks You Guys
Please Share This Link