chini khane se kya hota hai
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चीनी ज्यादा क्यों नहीं खाना चाहिए या चीनी खाने के फायदे व नुस्कान के बारे में
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)
चीनी के कम सेवन की सलाह देता
है। उसके अनुसार खाने में मीठे की
मात्रा कुल कैलोरी के 10 प्रतिशत से
अधिक नहीं होनी चाहिए और फिर इसे
पांच प्रतिशत तक लाना चाहिए।
जब तक सेहत पर मधुमेह या मोटापे का खतरा न हो, तब तक चीनी
कमखाने की ओर हमारा ध्यान नहीं जाता।जो कि ठीक बात नहीं है।
दैनिक जीवन में चीनी ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण
श्रोत है। शरीर में चीनी का सबसे महत्वपूर्ण
रूप ग्लूकोज है। मस्तिष्क को कार्य करने
के लिए प्रतिदिन लगभग 130 ग्राम चीनी (ग्लूकोजे)
की आवश्यकता होती है, जो फल, सब्जियों
और शहद आदि खाद्य पदार्थों से मिलती है।
स्वास्य कारणों से तमाम लोग यह महसूस
करते है कि चीनी के दानों में बहुत से
हानिकारक तत्व हैं, लेकिन उसके बिना
शरीर का ठीक से काम करना असंभव है।
भोजन में चीनी की मौजूदगी मूल अस्तित्व
के लिए ऊर्जा प्रदान करती है। मानव
मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाए या न्यूरॉन्स
बहुत अधिक मात्रा में होते हैं। यह सबसे
अधिक ऊर्जा की मांग करने वाला अंग है।
चीनी से मिलने वाली ऊर्जा का आधा हिस्सा मस्तिष्क
की गतिविधियों को प्रभावित करता है।
क्यों है खतरनाक?
चीनी को स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक मानने का
कारण उसमें पोषक तत्वों की कमी है। ऊर्जा में योगदान
के अलावा इसके अन्य किसी भी अच्छे प्रभाव का कोई
प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिलता
विभिन्न स्वास्थ्य मंचों
और वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों का सुझाव है कि
अत्यधिक चीनी के सेवन से शरीर में अन्य अनाजों को
पचने में काफी समय लगता है। साधारण चीनी, जैसे
कि टेबल शुगर, शहद और सिरप, जल्दी से
मेटाबोलाइज करते हैं और रक्त शर्करा में बेतरतीब
उतार-चढ़ाव उत्पन्न कर देते हैं, जिससे दांत का टूटना,
अधिक वजन, मोटापे का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भावस्था में कितनी
यदि आप गर्भावस्था के दौरान एक स्वस्थ आहार
योजना का अनुसरण कर रही हैं, तो आप परिष्कृत
चीनी का उपयोग बेहद कम मात्रा में करें। यही वजह
है कि गर्भावास्था के दौरान बहुत अधिक चीनी के
सेवन के लिए महिलाओं को मना किया जाता है।
पोषण अनुसंधान में यह प्रमाण मिले हैं कि सामान्य
सीमा में चीनी का प्रयोग सामान्य गर्भाधान के लिए एक
महत्वपूर्ण रास्ता है। ज्यादा मात्रा में चीनी के उपयोग से
गर्भावस्था में परेशानी तथा वजन बढ़ने की संभावना
अधिक रहती है। बहुत अधिक चीनी ग्लूकोज और
इंसुलिन के स्तर को बढ़ा सकती है। साथ ही लीवर में
फैट होने का खतरा भी बढ़ा देती है।
बच्चे के आहार में
भोजन में अत्यधिक मात्रा में चीनी का सेवन बच्चों
की रक्तवाहिका संरचना को बदल देता है, जिससे
उन्हें हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। बच्चों
में ये जोखिम सात वर्ष की आयु से पाए जा सकते हैं।
समय की कमी के कारण माताएं प्राकृतिक स्रोतों से
चीनी प्राप्त करने के बदले कृत्रिम रूप से बने मीठे
पेय और जंक फूड, दोनों का सेवन करने के लिए
बच्चों को प्रोत्साहित करती हैं। परिणामस्वरूप, सही
कैलोरीयुक्त खाद्य पदार्थों की कमी उल्लेखनीय रूप
से बढ़ गई है। उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ हमारी
थाली में बढ़ गए हैं।
कुछ सलाह
1- सप्ताहांत में, एक स्वादिष्ट विकल्प के लिए टोस्ट
और तले हुए या उबले हुए अंडे ले सकती हैं। केक,
पेस्ट्री, बिस्कुट या मिठाई के
अनसाल्टेड नट्स, ब्रेड स्टिक, फल और
सब्जी की स्टिक, ओट
या राइस केक पर
थोड़ी मात्रा में पीनट
बटर, कटा हुआ केला,
चीज आदि शामिल करें।
2 - हाई शुगर वाले नाश्ते को छोड़कर
ढोकला, सूप, दलिया, ग्रेनेरी टोस्ट, क्रम्पेट,
बैगल्स, सादा दही, फल के साथ लें।
3 - बच्चों को हेल्दी स्नैक्स खाने के लिए प्रोत्साहित करें
और उन्हें पौष्टिक आहार दें। उनके भोजन में साबुत
अनाज के विकल्प से फाइबर को बढ़ाएं।
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