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अप्रैल 20, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

liver ki dekhbhal kaise karen | liver ki dekhbhal aur healthy kaise rakhe in hindi | Liver Ka Dhyan Kaise Rakhe

लिवर (यकृत) की देखभाल या लिवर की देखभाल कैसे करे इन हिन्दी शरीर का अतिसंवेदी अंग है लिवर और हमारे खानपान का इस पर पड़ता है सीधा असर। अपनाएं सुव्यवस्थित जीवनशैली जिससे लिवर रहे सेहतमंद.... बीते वर्ष कोविड-19 पर इतना जोर दिया गया कि रोगियों द्वारा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की अनदेखी हुई। इससे हर बीमारी के रोगी प्रभावित हुए। लिवर मानव शरीर के सबसे प्रमुख अंगों में से एक है, जो हमारे दैनिक आहार के पोषक तत्वों को ऐसे पदार्थों में परिवर्तित करने का काम करता है, जिनका शरीर द्वारा उपयुक्त रूप से प्रयोग किया जाता है। लिवर इन पदार्थों को इकट्ठा करता है और आवश्यकतानुसार कोशिकाओं को इनकी आपूर्ति करता है। लिवर विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने का भी काम करता है और यह विटामिन की मदद से प्रोटीन का निर्माण करता है। इसके अतिरिक्त लिवर पुरानी या क्षतिग्रस्त रक्त कोशिकाओं को अपघटित करता है। शराब के सेवन और हेपेटाइटिस के चलते लिवर की बीमारियां होती हैं। यह बदलती जीवनशैली का परिणाम है कि खानपान के चलते लाइफस्टाइल बीमारियां जैसे डायबिटीज, मोटापा, ब्लडप्रेशर आदि में बढ़ोतरी हु...

interstitial lung disease in hindi | interstitial lung disease kya hai | treatment | symptoms

Interstitial Lung Disease  (इंटरस्टीशियल लंग डिजीज) इंटरस्टीशियल लंग डिजीज, लक्षण, उपचार इन हिन्दी या इंटरस्टीशियल लंग क्या होता है?  कई बीमारियों का समूह है इंटरस्टीशियल लंग डिजीज। उपचार और आहार-विहार को अपनाकर पाया जा सकता है इसमें नियंत्रण... इंटरस्टीशियल लंग डिजीज (आई.एल.डी.) दो सौ से अधिक रोगों के समूह को नाम दिया गया है, क्योंकि यह सभी क्लिनिकल, रेडियोलॉजिकल और पैथोलॉजिकल विशेषताओं को साझा करती हैं। इंटरस्टीशियल लंग डिजीज में थकावट, सूखी खांसी और सांस फूलने जैसे लक्षण पाए जाते हैं। इसमें चेस्ट एक्सरे में फेफड़े में धब्बे तथा लंग फंक्शन टेस्ट में फेफड़े की कार्य क्षमता कम दिखाई देती है। इंटरस्टीशियल लंग डिजीज के निदान में मरीज के लक्षणों की जानकारी, शारीरिक परीक्षण, चेस्ट एक्सरे, सीटी स्कैन तथा फेफड़ों की कार्य क्षमता देखी जाती है। दो भागों में बंटी होती हैं बीमारियां: इंटरस्टीशियल लंग डिजीज़ को दो भागों में बांटा गया है। एक वे, जिनमें कोई न कोई कारण का पता चलता है (जैसे पर्यावरणीय एवं औद्योगिक प्रदूषण, ऊतक रोग आदि) और दूसरा जिसमें विस्तारपूर्वक जांच के बाद ...