सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मार्च 19, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

jod dard ka tel | jodo ka dard oil | joint pain ointment | joint pain (Jod Dard) ki dawa

जोड़ों का दर्द की दवा या जोड़ों के दर्द तेल जोड़ों के दर्द से आपको दवाओं से कुछ दिनों के लिए आराम मिल सकता है, लेकिन दवा का प्रभाव खत्म होते ही आपको दोबारा दर्द का सामना करना पड़ेगा। पर 'अरोमा ऑयल्स' के जरिए आपको इससे लंबे समय के लिए फायदा मिल सकता है। इन तेलों का उचित प्रकार से प्रयोग करें। जोड़ों के दर्द में अरोमाथेरेपी फायदेमंद होती है। इन प्राकृतिक तेलों की खुशबू का प्रभाव सीधे हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है। यह प्रभावित हिस्से के रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं और सूजन कम करते हैं। कायेन पेपर ऑयल: इसकी कुछ बूंदों को नारियल तेल के साथ मिलाएं। तेल का प्रयोग दिन में दो से तीन बार करें। दो से तीन हफ्ते लगातार इस्तेमाल से फायदा होगा। लेमनग्रास ऑयलः राहत पाने के लिए इस ऑयल को अलग-अलग तरीकों से प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए पानी को उबालकर उसमें कुछ बूंदें लेमनग्रास तेल की डालें और प्रभावित हिस्से में भाप लें। इससे आपको काफी राहत मिलेगी। लोबान तेलः इस तेल को ऑलिव ऑयल के साथ मिलाकर सूजन वाले हिस्से में लगाएं। इससे सूजन कम होगी। पिपरमेंट ऑयलः तेल की पांच स...

keshar ki kheti | keshar itna mahanga kyu hai

 केसर की खेती ya केसर इतना महंगा क्यों है कश्मीर की खुशनुमा वादियों में केसर की खुशबू न सिर्फ फिजाओं में बिखरी हुई है, बल्कि इससे कितने ही घरों के चूल्हे भी जलते रहे हैं। करीब दो हजार साल से भी ज्यादा पुरानी केसर की खेती यहां आज भी उसी पारंपरिक तरीके से अंजाम दी जाती है। शायद यही वजह है कि विश्व में सबसे उम्दा किस्म का केसर उगाने का सेहरा कश्मीर के ही सिर है। हालांकि यह काम मशक्कत भरा है। करीब एक पाउंड (लगभग 454 ग्राम) केसर के लिए करीब 75 हजार फूलों को चुनना पड़ता है। केसर के जामुनी रंग के फूलों के बीच लाल रंग के रेशे से उम्दा किस्म का केसर निकलता है। इन फूलों को एक सप्ताह तक सूरज की रोशनी में सुखाकर डिब्बों में बंद कर दिया जाता है। एक किलो केसर की कीमत करीब एक से तीन लाख रुपये तक होती है। इसलिए इसे 'लाल सोना' भी कहा जाता है। भारत के अलावा यह ईरान, पाकिस्तान, स्पेन में भी उगाया जाता है। वहीं तजुर्बे के तौर पर अब इसकी किस्में उत्तराखंड के उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ जैसे क्षेत्रों में भी बोई जा रही हैं। इसका बीज करीब 10 से 15 वर्षों तक जीवित रहता है। कश्मीर की पारंपरिक केसर वाली चाय हो...

paryavaran ko surakshit kaise rakhe | paryavaran surakshit rakhne ke upay

पर्यावरण सुरक्षित रखने के उपाय ya  पर्यावरण को सुरक्षित कैसे रखें अक्सर हम बेवजह घर में लाइट जलाए रखते हैं। आप अपने बच्चों को लाइट के इस्तेमाल से संबंधी बातें जरूर बताएं। बच्चों को पानी का महत्व भी समझाएं। स्वस्थ जीवन के लिए पर्यावरण का साफ और स्वच्छ होना बहुत जरूरी है और यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखें। अगर बचपन से ही बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाए, तो इससे उनमें प्रकृति के प्रति लगाव पैदा होगा। चाहे वह साफ-सफाई हो या खाद्य स्रोतों का संरक्षण। इन सबके बारे में बच्चों को जरूर बताएं। इससे न केवल पर्यावरण के प्रति वे जागरूक होंगे, बल्कि भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक भी बनेंगे। प्रकाश पर बात ऊर्जा का संरक्षण सबसे जरूरी है, लेकिन हम इस ओर ध्यान नहीं देते। अक्सर हम वेबजह घर में लाइट जलाए रखते हैं। इसलिए आप बच्चों को लाइट के इस्तेमाल से संबंधी बातें जरूर बताएं। इसके अलावा पुराने बल्ब के स्थान पर ऊर्जा की बचत करने वाली एलइडी लाइट के बारे में जानकारी दें। बूंद-बूंद है जरूरी बच्चों को पानी के महत्व के बारे में जरूर बताएं। उन्हें यह भी बताएं कि कैसे बेव...