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अप्रैल 20, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

jivan(Life) me safalta(Success) pane ke upay, Ya Mahilaye(Woman) Life Me Safalata Kaise Hasil Kar Sakati Hain, Tips, Tarika Ke Bare Me Jankari

Jivan(Life) Me Ek Safal Yani Success Woman (Aurat) Kaise Bane?? आपके पास अच्छे विचार हैं, अच्छी योजनाए हैं और इन योजनाओ को पूरा करने की काबिलियत हैं, तो सफलता आपकी कदम चूमेगी। बस आप अपने शब्दकोश पर ध्यान दे। कहते हैं, इंसान की वाणी से ही उसकी पहचान बनती है। वह जो बोलता है, वही उसका अंतर्मन है, वही उसकी सोच है और उसी से उसके विचार दूसरों तक पहुंचते हैं। इसलिए विद्वानों ने कहा है कि जो भी बोलना हो, उसे तोलकर बोलना चाहिए। अर्थात खूब सोच विचारकर ही बोलना चाहिए। क्योंकि एक बार यदि शब्द आपके मुख से निकल गए, तो वे कभी वापस नहीं आएंगे। अपनी बात कहने के लिए आप जिन शब्दों का सहारा ले रही हैं, उन्हें नाप-तोलकर ही दूसरों तक पहुंचाएं। यदि आप महिला हैं और ऊंचे पद पर हैं, तो आपके लिए यह और भी चुनौतीपूर्ण तथा आवश्यक हो जाता है। जब आप अपने घर-परिवार और दोस्तों के बीच होती हैं, तो आपको अपने विचारों और सोच को व्यक्त करने में अधिक कठिनाई नही होती, क्योंकि अधिकतर लोग आपके व्यक्तित्व से वाकिफ होते हैं। लेकिन ऑफिस में ऐसा नहीं होता। ऑफिस में आपके साथियों, टीम के सदस्यों के बीच आपका व्यवहार, बोलने का ...

Clubfoot Kya Hai Aur Iska Treatment (Ilaj) Kaise Karaye, Lakshan Ke Bare Me Jankari Hindi Me

Clubfoot Kya Hai? आज की भाग-दौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी के कारण लोगों को अपने जीवन में कई असामान्यताओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह की एक असामान्यता ‘क्लबफुट' स्थिति है यानी अंदर की तरफ मुड़ी हुई पैरों की उंगलियां।  उदयपुर स्थित नारायण सेवा संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अमरसिंह चुंडावत के मुताबिक, यह एक जन्मजात ऑर्थोपेडिक विसंगति है, जो किसी पारंपरिक उपचार या ऑपरेटिव ट्रीटमेंट के बाद वापस पहले जैसी स्थिति में आ सकती है। दरअसल, यह एक जन्मजात दोष है, जिसमें पैर या तो अंदर की तरफ या नीचे की ओर घूमे हुए होते हैं। नतीजतन, इन बीमारियों से पीड़ित बच्चे बिल्कुल भी नहीं चल पाते हैं, यहां तक कि वे खुद बाथरूम तक भी नहीं जा पाते हैं। आमतौर पर, बच्चे के जन्म के करीब एक सप्ताह के भीतर इस स्थिति का पता लग जाता है। इस स्थिति का इलाज इसका पता लगने के तुरंत बाद शुरू होता है और ऐसे मामलों में प्री-सर्जिकल और पोस्टसर्जिकल उपचार भी उपलब्ध हैं।  जन्म के करीब एक सप्ताह के भीतर ही क्लब फूट का पता चलता हैं। यदि इस दौरान ही इसका उपचार हो जाए, तो इसके खतरे को कम किया जा सकता हैं। ...