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फ़रवरी 6, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

lassi ke fayde | lassi pine ke fayde hindi me | lassi peene ke kya fayde hain

लस्सी पीने के फायदे या लस्सी पीने के फायदे क्या फायदे हैं हिंदी में लस्सी : लस्सी उत्तर भारत में खूब पिया जाने वाला समर ड्रिक है। लस्सी पीने का सबसे ज्यादा चलन पंजाब हरियाणा, उत्तर प्रदेश में है। लस्सी सेहत के लिए बहुत गुणकारी पेय है। यह बॉडी की हीट को कंट्रोल में रखती है। इसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट और पानी की मात्रा शरीर में नमी बनाए रखती है। यह शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है। पाचन तंत्र को बेहतर बनाती है। एसिडिटी में राहत देती है। जो लोग वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए बहुत फायदेमंद है।

interior ghar ka design | ghar ka interior decoration | ghar ka interior kaise kare

होम इंटीरियर डिजाइन डेकोरेशन आइडियाज इन हिंदी में या घर का इंटीरियर के लिए क्या करे और कैसे करे   व्हाइट्स और न्यूट्रल्स एक तरह के आधारभूत रंग हैं, जिन पर रंगों और टेक्सचर की कई परतें इस्तेमाल करके कमरे को आकर्षक बनाया जा सकता है। बता रही हैं expert आजकल की भागदौड़ और तनावभरी जिंदगी में हर व्यक्ति सुकून और शांति चाहता है। ऐसे में घर और कार्यस्थल के इंटीरियर में सफेद रंग का अधिक से अधिक इस्तेमाल करके यह एहसास पाया जा सकता है। यही नहीं, आजकल थीम को लेकर घर की सजावट के दौर में व्हाइट थीम इंटीरियर की शान बन गया है। सफेद एक ऐसा रंग है जो कभी उबाऊ नहीं लगता है। यह स्पेक्ट्रम का बहुत ही नाटकीय, ताजगी से भरपूर और सुखदायक रंग है। सफेद रंग सौम्यता और आत्मविश्वास के साथ पवित्रता और स्वच्छता का एहसास करवाता है। इंटीरियर के दोष छिप जाते हैं सफेद रंग एक शुद्ध और व्यावहारिक रंग है। यह रंग आंतरिक सज्जा की अन्य वस्तुओं को उभारने में आधार का काम करता है। यही नहीं, सफेद रंग इंटीरियर के लिए एक इरेजर का काम भी करता है। फिर चाहे आपके घर में आर्किटेक्चर संबंधी कोई दोष हो या कोई और कमी, सफेद रंग उन पर मान...

shivratri kyu manayi jati hain | shivratri me upvas kaise kare | shivratri ke bare me jankari

शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है या शिवरात्रि उपवास का महत्व , शिवरात्रि को परिभाषित करो सब जानते हैं भगवान भोलेनाथ बहुत जल्दी खुश होते हैं। आशुतोष हैं वे, लेकिन अगर राशि के अनुसार शिव की पूजा करें, तो फल चमत्कार की तरह जिंदगी में आते हैं। भगवान शिव की पूजा में भाव का बड़ा महत्व है। 'शि' यानी मंगल और 'व' यानी दाता, अर्थात जो मंगलदाता है, वही शिव है। मां पार्वती ने कठिन तपस्या की, तो वर के रूप में उन्हें स्वयं आशुतोष भगवान शिव प्राप्त हुए। तभी से मान्यता है कि विवाह योग्य कन्याओं को उत्तम वर प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि पर पूरे मनोभाव से आराधना करनी चाहिए। वैसे भी आदिकाल से महादेव की पूजा- आराधना सभी करते आ रहे हैं। देवता ही नहीं, बल्कि दानव भी उनके उपासक रहे। आज भी शिव ऊंच- नीच, अमीर-गरीब, जात-पात, और यहां तक कि समाज-समुदायों की सीमा से परे होकर पूजे जाते हैं। दूसरे समाज-समुदायों के लोग और कलाकार इसलिए भी शिव को पूजते हैं, क्योंकि वे कलाओं के भी देवता वैसे भी प्रकृति में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ऊर्जाएं प्रवाहित होती रहती हैं। शिव उपासना इन दोनों ऊर्जाओं को संतुलित कर स...