परीक्षा के समय क्या खाना चाहिए या एग्जाम टाइम 'Eating Diet Plan Food' कैसे होना चाहिये
परीक्षा का समय सिर पर है। अच्छे अंक पाने की घबराहट और बेहतर प्रदर्शन के तनाव के बीच अक्सर बच्चों का खाने से मन उचटने लगता है। बच्चे या तो बहुत अधिक खाते हैं या फिर बहुत कम। खाने का असर काम करने के प्रदर्शन के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। परीक्षा की तैयारी करते बच्चों का डाइट चार्ट ऐसा बनाया जाना चाहिए, जिससे वे पढ़ाई में अधिक बेहतर ढंग से ध्यान एकाग्र कर सके, गरिष्ठ भोजन जहां आलस्य
बढ़ाता है, वहीं बहुत हल्के भोजन में पौष्टिक तत्वों की पूर्ति नहीं हो पाती है।
इसीलिए बैलेंस डाइट का महत्व और भी बढ़ जाता है, जब बच्चों को परीक्षा
में अच्छा प्रदर्शन करने का तनाव हो।
परीक्षा के चार महीने पहले से ही डाइट पर
विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। हालांकि बच्चों की
ऐसी डाइट होनी चाहिए, जिससे वे अधिक मोटे
बच्चों की श्रेणी में न गिने जाएं। इसलिए परीक्षा की
घड़ी में डाइट पर विशेष नजर रखने की जरूरत
और बढ़ जाती है। निश्चित रूप से डाइट में नाश्ता,
लंच और डिनर तीनों ही शामिल किए जाने चाहिए।
सबसे अहम है कि हम इन तीन तरह के खाने में
बच्चों को क्या परोस रहे हैं। साथ ही यदि तीन से
चार घंटे की लगातार पढ़ाई हो, तो बीच-बीच में
स्नैक्स का चयन कैसे किया जाए।
बच्चों की परीक्षा डाइट में इस बात का जरूर
ध्यान रखना है कि जो कुछ भी खाने के मीनू में
शामिल किया जाए, वह फाइबरयुक्त हो, अधिक
वसायुक्त तली हुई चीजें, जैसे- चिप्स, नमकीन
और भुजिया आदि नहीं होनी चाहिए। नाश्ते में पोहा
के साथ ओट्स, दूध और केला एक बेहतर विकल्प
हो सकता है, यह पचने में आसान होता है तथा
काफी पौष्टिक होता है। पढ़ाई में चूंकि मानसिक
श्रम की अधिकता होती है, इसलिए आजकल ब्रेन
फूड पर अधिक ध्यान दिया जाता है। पीनट बटर
नाश्ते में ब्रेड व ग्रीन टी के साथ दिया जा सकता
है। इसमें वसा की बेहद कम मात्रा होती है और
खाने के बाद आलस्य नहीं आता। जिन्हें मांसाहार
से परहेज नहीं है, वे लंच की ब्रेन डाइट में फिश
या मछली को प्रमुखता दे सकती हैं, जिसे रोस्टेड
रूप में ही दिया जाना चाहिए। मछली में ओमेगा थ्री
के साथ ही पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन होता है,
जो दिमाग को चुस्त और दुरुस्त रखता है।
इसके अलावा यदि शाकाहारी
बेहतर विकल्प ढूंढने हैं, तो
होलग्रेन व्हीट या पांच तरह
के अनाज से मिले आटे
को ब्रेड डाइट की संज्ञा
दी जाती है। इसमें ज्वार,
बाजरा और रागी
मिलाया जाता है।
चूंकि पचने में यह
थोड़ा वक्त लगाता
है, इसलिए पांच
अनाज से मिली हुई रोटी एक या
दो ही दी जानी चाहिए। दाल के साथ
सलाद और रायते को लंच में शामिल
करना न भूलें।
परीक्षाओं के समय डिनर पर भी
विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।
अधिकांश बच्चे सुबह उठने की जगह रात
में देर तक पढ़ना पसंद करते हैं। इसलिए
रात का भोजन बहुत हल्का और पौष्टिक
होना चाहिए। खाने के एक से दो घंटे बाद दूध का
सेवन किया जा सकता है। रात्रि के भोजन में
कोशिश करें कि चावल शामिल न हो। रोटियों को
हल्का घी लगाकर दिया जा सकता है। घी का सेवन
तीनों समय की डाइट में होना चाहिए। दिन भर में
तीन से पांच चम्मच देसी घी अवश्य दें। इसके साथ
ही तीन से चार घंटे के अंतराल में दिया जाने वाला
स्नैक्स भी पौष्टिक होना चाहिए। भूलकर भी बच्चे
को इस समय आलू के चिप्स या फिर तली भुजिया
आदि न दें। इसकी जगह ताजे फल व ड्राई फ्रूट्स
जैसे काजू को शामिल किया जा सकता है।
अखरोट को किसी भी रूप में दिया जाए, परीक्षा की
तैयारी कर रहे बच्चों के लिए बेहतर होता है।
भूलकर भी याद्दाश्त बढ़ाने वाले टॉनिक या दवाएं
न दें, इसका दुष्प्रभाव हो सकता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Thanks You Guys
Please Share This Link