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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में कैरियर कैसे बनाये याआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैरियर के बारे में जानकारी
न्यू एज कोर्स
मैन्युफैक्चरिंगवई-कॉमर्स
कंपनियों केबाद सर्विस
सेक्टर में भी आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस और मशीन
लनिंगका उपयोगलगातार
बढ़ रहा है। इसे देखतेहुए
अनुमान है कि आनेवाले
दिनों में तकरीबनहरफील्ड
में इसतकजीककेजानकारों
कीजरूरत होगी।हाल में
आइआइटीहैदराबादएआइ
में बीटेकप्रोग्रामशुरूकरने
वालादेशकापहलासंस्थान
बनगया है। आनेवाले दिनों में
अन्यसंस्थानों में भीयहकोर्स
शुरूहोने की उम्मीद है...
आने वाला दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
और मशीन का ही है। इसमें कोई
दो राय नहीं। अगले चरण की तकनीकी
क्रांति और औद्योगिक क्रांति के बीच बढ़ते ऑटोमेशन
के कारण एआइ/एमएल तकनीक का दबदबा आगे और
देखने को मिलेगा। तकरीबन हर चीज में यह तकनीक
दिखाई देगी। अभी की बात करें, तो आज रोबोट का
इस्तेमाल तकरीबन हर फील्ड में होने लगा है। बहुत कम
समय में कई सारे काम करने में माहिर इन ह्यूमनॉयड
रोबोट्स मांग लगातार बढ़ती जा रही है। आज चाहे
मेडिकल डायग्नोसिस का फील्ड हो, स्टॉक ट्रेडिंग हो,
स्मार्ट डिवाइसेज, हथियारों की मैन्युफैक्चरिंग का काम
हो या फिर रिमोट सेंसिंग जैसे अन्य फील्ड, सभी जगह
आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का काफी बढ़-चढ़कर उपयोग
हो रहा है। इस तकनीक के बिना तो वीडियो गेम इंडस्ट्री
की कल्पना ही नहीं जा सकती। कहा तो यह भी जा
रहा है कि हाल में वायरल 'हैशटैग 10 ईयस चैलेंज' 'के
पीछे भी कहीं न कहीं एआइ अलगोरिदम के लिए बड़े
पैमाने पर डाटा जुटाना ही है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में क्या होता है?
क्या है एआइ?: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ)
एक ऐसा कंप्यूटर बेस्ड सिस्टम है, जो उन सभी कार्यों को
भी करने में सक्षम होता है जिसे सिर्फ इंसान ही कर सकते
हैं। उदाहरण के तौर पर स्पीच रिकग्निशन, विजुअल
परसेप्शन, लैंग्वेज आइडेंटिफिकेशन, डिसीजन मेकिंग
तकनीक हमारे सामने हैं, जो आवाज सुनकर और
तस्वीरें देखकर किसी शख्स की पहचान कर लेते हैं।
इन तकनीकों से लैस स्मार्टफोन, चैटबॉट्स, वेबसाइट्स
समेत तमाम उपकरण और गैजेट्स आजकल देखे जा
सकते हैं। अपने आसपास आवाज की कमांड पर
ऑपरेट होने वाले डिवाइसेज को देखा जा सकता है।
सबसे अच्छा उदाहरण गूगल का पर्सनल असिस्टेंट
हमारे सामने है, जो हमारी आवाज सुनकर रिस्पॉन्स
करता है। तकनीकी जानकारों का मानना है कि वायस
और विजुअल रिकग्निशन के बाद आने वाले दिनों में
निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में भी बड़े पैमाने पर एआइ का
रोल देखने को मिलेगा।
ग्रोइंग करियरः एआइ के इस्तेमाल की बात करें, तो
अभी गूगल, फेसबुक, ट्विटर, अमेजन जैसी बड़ी सर्च
इंजन, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स कंपनियों में एआइ
तकनीक का सबसे अधिक उपयोग हो रहा है। यही कारण
है कि यहां कुशल और अपडेटेड एआइ डेवलपर्स की
खूब डिमांड है। इसके अलावा, रोबोटिक्स और डाटा
माइनिंग के फील्ड में भी ऐसे प्रोफेशनल्स की काफी
मांग देखी जा रही है। विशेषज्ञों की मानें, तो अभी अपने
करियर को आगे बढ़ाने के लिए इस फील्ड में आने का
यह बहुत ही उपयुक्त समय है, क्योंकि जॉब मार्केट में
एआइ इंजीनियर्स/डेवलपर्स की अभी जितनी मांग है,
उतने लोग मिल नहीं रहे हैं। फिलहाल, अभी ऑटोमेशन
और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में डिग्री हासिल करने
वाले युवाओं के लिए इस क्षेत्र में एआइ इंजीनियर,
एआइ डेवलपर, गेम प्रोग्रामर, रोबोटिक साइंटिस्ट या
फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर डेवलपर के
रूप में कई तरह के करियर स्कोप हैं।
2019 सत्र से आइआइटी हैदराबाद
शुरू कर रहा है आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस में बीटेक डिग्री प्रोग्राम।
2020 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और
मशीन लर्निंग के क्षेत्र में करीब 20
से 22 लाख नई नौकरियां सामने आने की उम्मीद।
प्रमुख संस्थान
• आइआइटी हैदराबाद/बांबे/मद्रास
www.iith.ac.in
• नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ
टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
www.nsit.ac.in
बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड
साइंस (बिट्स), पिलानी
www.bits-pilani.ac.in
बढ़ती संभावनाएं: आज की तारीख में ऑटोमेशन
को देखते हुए सभी बड़े कॉरपोरट हाउसेज, बड़ी-बड़ी
कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग
पर ज्यादा से ज्यादा निवेश करने पर जोर दे रही हैं। बड़ी
कंपनियों के अलावा बैंकों, मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज,
सर्विस सेक्टर्स की नौकरियों में भी एआइ और एमएल
यानी मशीन लर्निंग का रोल लगातार बढ़ रहा है।
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स की हाल की
एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 तक दुनियाभर की
फैक्ट्रियों में करीब 1.7 मिलियन नये इंडस्ट्रियल रोबोट
इंस्टॉल किए जाएंगे। इससे रोबोट की बिक्री करीब 20
से 25 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है।
वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए: आइआइटी हैदराबाद
के एमटेक इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एमटेक
प्रोग्राम इन मशीन लर्निंग और एमटेक इन डेटा साइंस
जैसे मास्टर डिग्री कोर्स को वर्किंग प्रोफेशनल्स भी
बड़ी आसानी से कर सकते हैं, क्योंकि यह पूरा कोर्स
ऑनलाइन माध्यम से ऑफर होता है, जिसे नौकरी करने
के साथ-साथ किया जा सकता है। कोर्स को 2 से 5 साल
में पूरा करने की छूट भी मिलती है।
शॉर्ट टर्म/माइनर प्रोग्राम्स : आइआइटी हैदराबाद समेत
अन्य संस्थानों में संचालित शार्ट टर्म कोर्स उन छात्रों के
लिए है, जो बीटेक के अन्य स्ट्रीम में हैं और एआइ में भी
अपनी स्किल को बढ़ाना चाहते हैं।
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