सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Self Talk Ya Khud Se Kaise Baatein Karene Se Fayde (Benefits) In Hindi

Self Talk Ya Khud Se Kaise Baatein Kare In Hindi अच्‍छी है खुद से खुद की बतकही चलते-चलते कभी पेड-पौधों से बाते कर लेना। कभी खुद से ही मन की बात करना। घर में कोई नहीं, तो अपने डॉगी से बतियाना। अक्‍सर लोग इसे मानसिक बीमारी से जोडकर देखते है, लेकिन मन की सेहत के लिए ख्‍ह अच्‍छा है।जब कोई बच्‍चा अकेले में अपने खिलौनों, गुड्डे-गुडियों या पालतू जानवर से बात करता है, तो लोग इसे बचपना समझते है। ऐसी हरकत जब कोई व्‍यस्‍क करता है, तो लोग उसे बेवकूफ या पागल समझ बैठते है। कई शोध के अनुसार, अकेले में खुद से, पेड-पौधों या फिर पेट्स से बातें करना सेहतमंद रहने का एक आसान जरिया है। इससे आपके अंदर दबी तमाम परेशानियां, तकलीफें कम होती है। कई तरह की मानसिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है। ‘जर्नल ऑफ एक्‍सपेरिमेंटल साइकोलॉजी’ में प्रकाशित शोध के अनुसार, जो लोग अक्‍सर आत्‍मालाप (खुद से बातें करना) करते है, उनकी सोच, समझ और जवाब देने की क्षमता में सुधार होता है। इससे बच्‍चों के बर्ताव को निर्देशित करने में भी मदद मिलती है। 1. 2. 3. 4. 5. अकेले, तो क्‍या गम है   घर पर अकेले है। ...

Virgin Olive Oil Extra Virgin Difference Fayde In Hindi

तेल तय करने से पहले वर्जिन ऑलिव ऑयल सब्‍जी में डालें या एक्‍स्‍ट्रा ऑलिव ऑयल ?? यदि आपके मन में भी कई सवाल है, तो पहले पूरी जानकारी ले लें। 1. 2. 3. 4. 5. सरसों, नारियल, रिफाइंड आदि तेलों के बाद अब किचन में ऑलिव ऑयल ने भी जगह बना ली है। लोग भोजन के साथ-साथ त्‍वचा और बालों को स्‍वस्‍थ बनाए रखने के लिए इसका इस्‍तेमाल करने लगे   है। शोध की माने तो संबंधित बीमारियों और डायबिटीज से भी बचाता है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ई और एंटीऑक्‍सीडेंट भी भरपूर होता है। न्‍यूट्रिशनिस्‍ट कहते है , ऑलिव ऑयल कई चरणों में तैयार होते है। कई वर्गों में बंटे होते है, जो इसकी शुद्धता और पौष्टिकता को दर्शाते है। पहले और दूसरे प्रेसिंग में निकला हुआ तेल न्‍यूट्रिशनल वैल्‍यू में बेहतर होता है। एक्‍स्‍ट्रा वर्जिन या वर्जिन की गुणवत्‍ता ऑयल प्रेसिंग पर निर्भर करती है। किस ऑलिव ऑयल का इस्‍तेमाल कब और कहां करना चाहिए, यह जानना जरूरी है। अधिकरत लोग बिना जाने इसका इस्‍तेमाल करते है। खरीदते समय ध्‍यान से डिब्‍बे पर लिखी हुई जानकारियों को पढें। सब्‍जी या नॉनवेज बनाने के लिए एक्‍स्‍ट्र...

Aalu Aur Sakarkand(Sweet Potato) Ke Fayde

कहां आलू और कहां शकरकंद ? 1. 2. 3. 4. 5. एक तरफ पोटैटो(आलू) तो दूसरी तरफ स्‍वीट पोटैटो (शंकरकंद) दोनों है , तो एक ही प्रजाति के , लेकिन दोनों में काफी फर्क है। सिर्फ स्‍वाद ही नहीं , बल्कि सेहत के मामले में भी इनके गुण अलग है। अक्‍सर लोग दोनों को एक ही समझ बैठते है। कई शोध में यह बात सामने आई है कि आलू के अधिक सेवन से वजन बढता है , जबकि शकरकंद के साथ ऐसा नहीं है। सीनियर डाइटिशियन कहती है कि आलू में विटामिन सी एवं बी , पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होता है , तो वही शकरकंद में मैग्‍नीशियम , फॉस्‍फोरस , आयरन और जिंक अधिक होता है1 आलू से हमें कार्बोहाइड्रेट स्‍टार्च के रूप में मिलता है , जिसका कुछ हिस्‍सा फाइबर की तरह काम करता है , इसलिए यह आंत के कैंसर से बचाता है। वहीं शकरकंद में कई प्रकार के एंटीऑक्‍सडेंटस पाए जाते है , जो फ्री रैडिकल्‍स से होने वाले नुकसान से बचाता है। आलू के तत्‍व हडिडयों को मजबूत बनाते है। अलावा इसका छिलका सेहत के लिए काफी अच्‍छा है। अगर हम प्रतिदिन दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोडे से दही के साथ खाएं , तो वह भी एक संपूर्ण आहार का काम करेगा। आ...

Naukari Ya Career Me Promotions Kaise Kare Ya Pane Ke Upay Ya Tarakki

Naukari Ya Career Me Promotions Kaise Kare, Kare Trick Aur Upay प्रोफेशनल लाइफ में हर कोई आगे बढना चाहता है, लेकिन कई बार छोटे-छोटे कारणों की वजह से प्रमोशन नही मिल पाता। प्रमोशन के लिए खुद को साबित करें।   प्रोफेशनल में प्रमोशन पाने के लिए हर कोई जी-तोड मेहनत करता है, लेकिन सबको प्रमोशन नहीं मिल पाता । हमेशा ध्‍यान रखें कि आपकी संस्‍था आपका प्रमोशन तभी करेगी, जब व‍ह सुनिश्चित कर लें कि आपको जो काम दिया जाएगा, उसमें कंपनी को कोई जोखिम नहीं, बल्‍कि फायदा है। इसलिए आपको चाहिए कि आप अपने ज्ञान, दक्षता से यह साबित कर दें कि नए पद को संभालने के लिए आप पूरी तरह से तैयार है। जब भी आप प्रमोशन की बात के लिए बॉस के पास जाएं, तो अगले दो से पांच साल में अपने करियर को लेकर आकांक्षाएं, पद की चाहत आदि के बारे में पहले से ही तय कर लें। अन्‍यथा बॉस के पूछने पर आप सही ढंग से जवाब नही दे पाएंगे। 1. 2. 3. 4. 5. बासॅ से प्रमोशन की बात करते समय, पॉजिटिव व नेगेटिव दोनों फीडबैक सुनने के लिए तैयार रहे।ऑफिस की कैंटीन और कैंपस में ज्‍यादा समय बर्बाद न करें प्रमोशन केवल काम पर ...

How Does Make Career In Cartoon Or Sketch Caricature Artist In Hindi - Caricature Me Career Kaise Banaye

What Is Cartoon Caricature Artist ? Sketch Or Cartoon Caricature Me Career Kaise Banaye? प्रिट मीडिया हो या इलेक्‍ट्रॉनिक, कार्टून कैरिकेचर का इस्‍तेमाल हर माध्‍यम में होने लगा है। जाहिर है, ऐसे लोगों की मांग भी होगी, जो कैरिकेचर बनाने में माहिर हों। 1. 2. 3. 4. 5. आंकडे बोलते है   10 टॉप के क्रिएटिव कोर्स में से एक है 20000 रूपये से शुरू हो जाती है, सैलरी आजकल कई मीडिया हाउस कैरिकेचर की मदद से प्रैंक वीडियो बना रहे है। लोगों को कैरिकेचर देखना पसंद आ रहा है। कहते है, एक फोटो दस हजार शब्‍दों के बराबर होती है1 ऐसे ही एक कैरिकेचर आर्टिस्‍ट द्वारा बनाया गया चित्र भी हजार शब्‍दों के बराबर होता है। भाषा के इस माध्‍यम को लोग भलीभांति समझते भी है। शायद यही वजह है कि आजकल कई पब्लिशिंग हाउस और प्रिंट मीडिया साधारण फोटो की बजाय कैरिकेचर का इस्‍तेमाल करने लगे है। अगर आपको ड्रॉइंग करना अच्‍छा लगता है, आप अपनी क्रिएटिविटी से कुछ अलग करना चाहते है, तो आपके लिए कैरिकेचर कोर्स एक बेहतर विकल्‍प है। कैरिकेचर आर्टिस्‍ट, इलेस्‍ट्रेटर और कार्टूनिस्‍ट से अलग होता है। कैरिकेच...

DSLR And SLR Difference In Hindi

डीएसएलआर और एसएलआर में अंतर कैमरे दो प्रकार के होते है , जिनमें डीएसएलआर और एसएलआर है। डीएसएलआर का मतलब है डिजिटल सिंगल लेंस रिफ्लेक्‍स। एसएलआर से इमेज कैमरा सेंसर और व्‍यूफाइंडर में भी दिखाई देती है। जैसे ही कैमरे का शटर और कैमरे का मिरर रिलीज होता है , लाइट लेंस से सीधे इमेज सेंसर पर प्रोजेक्‍ट हो जाती है। वहीं , डीएसएलआर में रिमुवेबल लेसेज लगे होते है। 1. 2. 3. 4. 5. डीएसएलआर कैमरे में क्रिएटिव कंट्रोल फंक्‍शन होता है और प्‍वॉइंट एंड शूट कैमरों के मुकाबले इमेज प्रोसेसिंग पर ज्‍यादा कंट्रोल होता है।

Kya Non Stick Pot Khana Khatarnak Hain

क्‍या नॉन स्टिक बर्तन खतरनाक है ! 1. 2. 3. 4. 5. कम ऑयल वाला खाना बनाने के लिए हम नॉन-स्टिक बर्तन इस्‍तेमाल करते है , लेकिन ये बर्तन हानिकारक है। नॉन-स्टिक बर्तन में खाना बनाने से परफ्लूरिनेटेड कम्‍पाउड शरीर में पहुच जाता है , जो थायरॉइड को बढाता है। ये आपके लिवर को खराब कर सकता है। इनसे टॉक्सि फ्यूम्‍स निकलती है , जो पेट को खराब करती है। नॉन-स्टिक बर्तनों को बनाने में इस्‍तेमाल होने वाले ऑर्गेनिक कंपाउंड्स और डाइबिटीज में संबंध पाया गया है।