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आईएएस अधिकारी - ias ki taiyari kaise karen

आईएएस ऑफिसर बनने के लिए तैयारी कैसे करे ? संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 2022 की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आगामी पांच जून को प्रस्तावित है। इस परीक्षा की उत्तीर्ण करने के बाद ही अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलता है। परीक्षा के चरणः यह परीक्षा कुल तीन चरणों में होती है। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार। अंतिम रूप से चयन मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में मिले अंकों के आधार पर होता है। प्रारंभिक परीक्षा एक तरह से स्क्रीनिंग परीक्षा होती जो अभ्यर्थियों की भीड़ को कम करती है। प्रारंभिक परीक्षा पैटर्नः प्रारंभिक परीक्षा में दो पेपर होते हैं। पेपर एक सामान्य अध्ययन का होता है, जबकि पेपर दो एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) का होता है, जो सिर्फ क्वालीफाइंग प्रकृति का, होता है, जिसमें कुल 33 प्रतिशत अंक लाने होते हैं।  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र में मिले अंकों के आधार पर प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करना होता है। इस पेपर में कुल 100 प्रश्न 200 अंकों के होते हैं। चूंकि सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र में मिले अंक ही प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने का आधार हैं...

stanpan ke fayde | stanpan ke labh

नवजात शिशु का ख्याल कैसे रखें  नवजात शिशु का ध्यान कैसे रखें कोरोना संक्रमण के दौर में नन्हें व नवजात शिशुओं का खयाल रखना भी है एक चुनौती। इसके लिए उन्हें स्तनपान कराना जरूरी है ताकि बेहतर विकास के लिए न सिर्फ उन्हें जरूरी पोषण मिल सके, बल्कि रोगों से लड़ने की ताकत भी मजबूत हो। मां के स्वास्थ्य के लिए भी यह समान रूप से जरूरी है। कोरोनाकाल में स्तनपान के विषय में कई तरह की भ्रांतियों ने जन्म लिया है, जिनकी हकीकत समझना जरूरी है, क्योंकि शिशु के लिए मां का दूध है अमृत... कोविड-19 वायरस शिशुओं को अपना निशाना बनाने में नाकाम रहा है, यह बेहद सुकून की बात है, पर उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा कवच देना जरूरी है और यह संभव है सुरक्षित स्तनपान से। मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण पोषण होता है। यह वायरस या बैक्टीरिया से बचाव के लिए उनमें एंटीबाडीज बनाता है साथ ही यह अस्थमा व एलर्जी का खतरा भी कम करता है। शिशु के जन्म के छह माह तक उसे सिर्फ मां का दूध प्राप्त होना चाहिए। इसके बाद स्तनपान के साथ ही फार्मूला दूध या अन्य तरल पदार्थ दिए जाने चाहिए। कोरोना पाजिटिव हों तो भी कराएं स्तनपान: ...

touch kaam na kare to kya karen

टचपैड काम नहीं कर रहा है तो क्या करे या उसे कैसे ठीक करे? टच पैड जब न करे काम तो क्या करे विंडोज 1 लैपटाप पर काम करने के दौरान कई बार ऐसा होता है कि टचपैड अचानक कार्य करना बंद कर देता है। विंडोज 11 में अपडेट के बाद कई सारे यूजर्स को लैपटाप के टचपैड में समस्या आने लगी है। वैसे, टचपैड कार्य न करने के बहुत से कारण हो सकते हैं। हो सकता है कि टचपैड के नीचे धूल जमा हो या फिर मालवेयर की वजह से टचपैड ने रिस्पांस करना बंद कर दिया हो। अगर किसी कारण से आपके लैपटाप का टचपैड कार्य नहीं कर रहा है, तो इसे आप सावधानी के साथ खुद भी ठीक करने की कोशिश कर सकते हैं। आइए जानते हैं टचपैड फंक्शनैलिटी से जुड़ी समस्याओं को कैसे ठीक किया जा सकता है: डिवाइस मैनेजर का करें उपयोग : टचपैड ड्राइवर्स से जुड़ी समस्या को ठीक करने के लिए विंडोज के अंदर डिवाइस मैनेजर प्रभावी मैनेजमेंट टूल है। इसके माध्यम से टचपैड ड्राइवरों को आसानी से अपडेट और ठीक किया जा सकता है... विंडोज की को प्रेस करें और डिवाइस मैनेजर एप को सर्च कर ओपन करें। • डिवाइस मैनेजर विंडो के अंदर माउस व अन्य डिवाइस को सर्च करें। यहां टचप...

प्लास्टिक सर्जरी की पूरी जानकारी - प्लास्टिक सर्जरी क्या है

प्लास्टिक सर्जरी के बारे में जानकारी या प्लास्टिक सर्जरी की पूरी जानकारी भारतीय चिकित्सा पद्धति में सर्जरी का इतिहास बेहद पुराना है। भारतीयों ने ही प्लास्टिक सर्जरी का हुनर विदेशी चिकित्सकों को सिखाया। बावजूद इसके, आज भी प्लास्टिक सर्जरी को लेकर अधिकांश लोगों में तमाम भ्रांतियां व्याप्त हैं......... आज भी प्लास्टिक सर्जरी को लेकर भ्रांति है कि यह केवल उच्च आय वर्ग के लोगों के लिए है जो इसकी मदद से अपनी सुंदरता में इजाफा कर सकते हैं, जबकि प्लास्टिक सर्जरी का काम सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं। दरअसल, अन्य चिकित्सकों की भांति प्लास्टिक सर्जन किसी खास अंग के स्पेशलिस्ट नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए जिम्मेदार होता है। प्लास्टिक सर्जरी किसी भी अंग की आवश्यकता हो सकती है। इसके अंतर्गत जन्मजात, इंफेक्शन, दुर्घटना, कैंसर या जल जाने के कारण नष्ट या विकृत हुए अंग को दोबारा ज्यादा से ज्यादा असली रूप में लाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। शिशुओं के होंठ और तालू की सर्जरी, जन्मजात अविकसित अंगुली, अंगूठा, कान आदि को ठीक करने के लिए प्लास्टिक सर्जरी आज एक बड़ी कारगर तकनीक है। इसी क्रम में आग...

aadhar card bina mobile number kaise nikale ya download kare

आधार कार्ड बिना मोबाइल नंबर के कैसे निकाले या डाउनलोड कैसे करे अब आप अपना आधार कार्ड बिना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के भी यूआइडीएआइ की आधिकारिक वेबसाइट (https://uidai.gov.in) से डाउनलोड कर सकते हैं। आधार जारी करने वाली यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथारिटी आफ इंडिया (यूआइडीएआइ) ने यह घोषणा उन लोगों की मदद करने के लिए की है, जिन्होंने अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर नहीं किया है। आपको बता दें कि पहले यूजर्स को इसे डाउनलोड करने के लिए आधार से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की जरूरत होती थी। आप आधार कार्ड को ऐसे आनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं.... सबसे पहले यूआइडीएआइ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और 'माई आधार' पर टैप करें। फिर आपको 'आर्डर आधार पीवीसी कार्ड' पर क्लिक करना होगा। इसके बाद 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करने के लिए कहा जाएगा। चाहें, तो आधार नंबर के बजाय 16 अंकों वाला वर्चुअल आइडेंटिफिकेशन नंबर (वीआइडी) भी दर्ज कर सकते हैं। एक बार जब यह पूरी प्रक्रिया कर लेते हैं, तो सुरक्षा या कैप्चा कोड दर्ज करने के लिए कहा जाएगा। अब यदि रजिस्टर मोबाइल नंबर के बिना कार्ड डाउनलोड करना चाहते हैं, तो 'मेर...

वायु जनित रोग - वायु जनित बीमारियों से कैसे बचे

वायु जनित बिमारियो या रोगों से कैसे बचे बुरा वक्त भविष्य के लिए कई तरह के सकटे खड़ा कर  जाताहै। कोरोना संक्रमण नेसमाजको बुरी तरह प्रभावित किया, लेकिन सेहतकेप्रतिसतर्करहने कीसीखभी मिल रही है।यदिइसी तरह हम स्वास्थ्यकेप्रतिसजग रहें तोवायुजनित रोगों से नकेवलबचे रहेंगे, बल्कि हर सालइससेहोनेवाली मौतों कोटालाजासकता है।ध्यान रखने की बात यह है कि अधिकतर संक्रमण श्वसनमार्ग से ही होते हैं... कोरोना महामारी से लोगों में सेहत के प्रति जागरूकता काफी बढ़ गई है। वयस्क हों या बुजुर्ग सभी की आदतों में बड़ा बदलाव दिख रहा है। खासकर, कोमर्बिडिटी ग्रुप के मरीजों में दूसरी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए हेल्थ मानीटरिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। वास्तव में लोगों के जीवन में आई यह सजगता स्वस्थ भारत के निर्माण की बुनियाद बन रही है। ऐसी ही सकारात्मक पहल के जरिए एक बड़ी आबादी को कई वायुजनित बीमारियों से बचाया जा सकता है। इनमें ज्यादातर रोगों का माध्यम यानी रास्ता एक ही है, वह है व्यक्ति का श्वसन मार्ग। इसलिए सावधानी बरतकर वायुजनित रोगों से हर साल लाखों लोगों की मौत को टाला...

पल्मोनरी एम्बोलिज्म - pulmonary embolism ke lakshan | Ilaj | Upchar

पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लक्षण (Symptoms), इलाज(Treatment), उपचार के बारे मे जानकारी हिन्दी में फेफड़ों की रक्त नलिकाओ के अवरुद्ध होने पर बनती है पल्मोनरीएबोलिज्म की स्थिति। इसलिए लक्षणों की न करें अनदेखी और समय परकराए उपचार... अस्पताल में भर्ती मरीज की सेहत में सुधार हो रहा था, लेकिन अचानक हालत बिगड़ी और मौत हो गई। टांगों में दो-तीन दिन सूजन व दर्द की परेशानी रही और व्यक्ति की मौत हो गई या शिशु को जन्म देने के बाद प्रसूता स्वस्थ थी, लेकिन घबराहट हुई और मौत हो गई। ऐसे मामले अक्सर सुनने में आते हैं। प्रारंभिक कारणों की बात की जाए तो यही पता चलता है कि सब कुछ ठीक था, बस तेजी से सांस उखड़ी और कुछ मिनटों में जान चली गई। यह सच है कि जब धड़कनें थमेंगी मौत तभी होगी, लेकिन इनके थमने का कारण क्या रहा? इसका वास्तविक कारण था, 'पल्मोनरी एंबोलिज्म', जो कि एक मेडिकल स्टेज है। पल्मोनरी एंबोलिज्म का मतलब है, फेफड़ों की रक्त नलिकाओं का अवरुद्ध हो जाना। किन लोगों को है खतरा: कुछ लोगों के रक्त में जन्म से ही प्रोटीन 'सी,' व 'एस,' 'एंटी थ्रोबिन 3' और फ...