नौकरी से असंतुष्टि के कारण युवा वर्ग एंटरप्रेन्योर बनने की राह पर निकल पडा है। इसके लिए जरूरी है कि आप दूरदर्शी हो और जोखिम लेना जानते हों। जब बनना हो खुद का बॉस एंटरप्रेन्योरशिप एक ऊंचे पहाड से कूदने की तरह है, जिसमें एक एंटरप्रेन्योर अपना पैराशूट पहाड से कूदने के बाद बनाता है। यह कहावत बेशक उन लोगों के लिए कही गई है, जो अपनी जिंदगी में कुछ पाने के लिए जोखिम लेने को तैयार रहते है। आज केे दौर के युवा तो जोखिम के लिए हमेशा खुद को तैयार रखते है। कामयाबी की चाह हर किसी के भीतर होती है और जोखिम उठाए बगैर कामयाबी के सपने देखना बेईमानी लगता है। यहां जोखिम का अर्थ करियर की राह में आने वाली चुनौतियों से है, जिससे घबराकर लोग अपने सपनों का पीछा करना छोड देते है, जबकि चुनौतियों से पार कामयाबी की मंजिल होती है।आजकल बहुत से युवा नौकरी करने के बजाय एंटरप्रेन्योर बनने में रूचि दिखाने लगे है।एंटरप्रेन्योरिशप में मनचाहा काम और कमाई होती है, तो नौकरी छोडने का रिस्क ले सकते है। 1. 2. 3. 4. 5. कॉलेज छोड एंटरप्रेन्योरकटक के ऋजेश अग्रवाल ने जब 17 वर्ष की उम्र में कॉलेज ...
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