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Aansu Ke Bare Me Janakari | Aansuo Ke Bare Me Janakari

आंसू के बारे में जानकारी या आंसुओं के बारे में जानकारी बताइए आंसू दिल की जुबान हैं, आंसू दुखों की दास्तान हैं। आंसू आंख से टपकते हैं, तो मोती बन जाते हैं और नहीं टपकते तो खामोशी बन जाते हैं। आंसू अनमोल हैं, इन्हें बचाकर रखिए, लेकिन ठहरिए! कहीं ऐसा न हो कि इन्हें संभालते-संभालते ये ठहर जाएं या फिर सूख ही जाएं और जब खुशी में आपकी आंखें बरसना चाहें या फिर दुख भरे समय में आप रोना चाहें, तो रो भी न पाएं। हम सबने देखा है कि जब किसी के जीवन में अचानक कोई बड़ा दुख आ जाता है, तो सदमे में उसकी आंखों से आंसू नहीं टपकते। यह न रोना उसे अंदर ही अंदर घोंट देता है। तनाव और अवसाद का शिकार बना देता है। वैसे तो हर आंख में आंसू होते हैं और कोई नहीं चाहता कि उसके जीवन में ऐसे पल आएं, जब उसे रोना पड़े। मगर आज इन आंसुओं के मायने कुछ-कुछ बदल से गए हैं। आप हैरान हो सकती हैं कि कई मानसिक और शारीरिक बीमारियों में डॉक्टर आंसुओं की कीमत समझ रहे हैं। सदमा, अवसाद, एंग्जाइटी में तो मनोचिकित्सक दवाओं के साथ रोने की सलाह दे रहे हैं। विदेशों में और अब अपने यहां भी 'क्राइ रूम' बना रखे हैं। कई डॉक्टर अपने मरीजों क...

kitabi gyan se anubhav upyogi | kitabi gyan ya anubhav

किताबी ज्ञान का महत्व या अनुभव का महत्व किताबी ज्ञान बहुत जरूरी है। क्लास में बच्चे अच्छा करें, यह भी जरूरी है। लेकिन किताबी ज्ञान से अलग भी है एक दुनिया, जहां बच्चों का आत्मविश्वास उनकी सबसे बड़ी पूंजी होता है। वक्त में तेजी से आ रहे बदलाव के साथ ही हमारी आने वाली पीढ़ी की सोच-समझ और उनके सपनों में भी बदलाव लाजमी है। सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा जिंदगी में कुछ बेहतर करे, अपनी एक अलग पहचान बनाए और जिंदगी में संघर्षों से जूझना सीखे। कई माता-पिता अपने बच्चों के लिए ऐसी बातें भी खुद ही तय कर लेते हैं। वहीं, कुछ माता-पिता बच्चों के फैसले खुद लेने के बजाए बच्चों को इस लायक बनाते हैं कि वे अपने फैसले खुद कर सकें। परवरिश के दौरान कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप उनका बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकती हैं। जिंदगी की किताब कई माता-पिता को लगता है कि किताबी ज्ञान ही सब कुछ है और वे बच्चों को दिनभर किताब में ही उलझाए रखना चाहते हैं। ऐसे में बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान नहीं मिल पाता, जिसकी जरूरत स्कूल के बाद उन्हें सबसे ज्यादा पड़ती है। इसलिए बच्चों को पढ़ाई से अलग थोड़ा समय खेल-कूद, टीवी और सिल...

Freeze me kya kya rakhate hain? refrigerator me kya rakhe kya na rakhe janakari

फ्रिज में न रखें ये सामान, फ्रिज में क्या न रखें या फ्रिज में न रखें कद्दू : कद्दू को भी फ्रिज में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ज्यादा नमी मिलने के कारण कदू सड़ जाता है। कद्दू को नमी की जरूरत होती है, लेकिन इतनी नहीं कि वह सड़ जाए। कॉफी : कॉफी को कमरे के तापमान में टाइट कंटेनर में ही रखना चाहिए, क्योंकि फ्रिज में रखने से कॉफी ठंडी हो जाती है, जिसके कारण उसका अपना स्वाद नहीं रह जाता है। नमी कॉफी के स्वभाव के लिए अच्छी नहीं होती है। प्याज : प्याज काटने से पहले उसे कमरे के तापमान में छोड़ देना चाहिए। इससे उसका प्रभाव कम हो जाता है। प्याज को काटने के बाद जरूरी है कि उसे फ्रिज में रखा जाए, नहीं तो वह सूख जाएगी। रखने से पहले प्याज को प्लास्टिक बैग में पैक करके सब्जी वाले डिब्बे में रखना चाहिए। तरबूज : गर्मियां शुरू होते ही तरबूज बाजार में दिखने लगता है। ऐसे में लोग तरबूज ज्यादा खरीदकर फ्रिज में स्टोर कर लेते हैं, ताकि उन्हें बार-बार बाजार न जाना पड़े, लेकिन ध्यान रखें कि कटा हुआ तरबूज फ्रिज में किसी चीज में लपेटकर ही रखें, क्योंकि तरबूज दूसरे खाद्य पदार्थों के स्वाद को अवशोषित कर लेता है। आलू : ...

Shivratri Me Bhagvan Shiv Ka Abhishek Kaise Kare

 शिवरात्रि  में भगवान शिव का अभिषेक कैसे करें। राशि के अनुसार करें अभिषेक राशि के अनुसार भगवान शिव का पूजन करने से शिव कृपा और मनचाहे वर की मनोकामना आसानी से प्राप्त की जा सकती है। मेष राशि की कन्याएं गुड़ के जल से अभिषेक करें। लाल पेड़ा, लाल चंदन और कनेर के फूल चढ़ाए। वृष राशि वालों को दही से अभिषेक करना चाहिए। शक्कर, चावल, सफेद चंदन और सफेद फूल चढ़ाने चाहिए। मिथुन राशि के लोगों को बाच्ने के रस से शिव का अभिषेक करना चाहिए और मूंग, दूब तथा कुशा चढ़ाना चाहिए। कर्क राशि वाले घी से अभिषेक करें और चावल, कच्चा दूध, सफेद आर्क तथा शंख पुष्पी अर्पित करें। सिंह राशि की कन्याए गुड़ के जल से अभिषेक करें। साथ ही गुड़ और चावल से बनी खीर का नैवेद्य तथा मदार के फूल अर्पित करें। कन्या राशि वालों को गन्ने के रस से अभिषेक करने के साथ भांग दूब, मूंग और पान अर्पण करना चाहिए। तुला राशि की कन्याओं । को सुगंधित तेल या इत्र से भोलेनाथ का अभिषेक करना चाहिए। साथ ही दही, शहद, श्रीखंड का नैवेद्य और सफेल फूल चढ़ाने चाहिए। वृश्चिक राशि वालों को पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। साथ ही लाल मिठाई और लाल पुष्प चढ...

chasma lagane ka tarika | (Glasses) chasma lagane ke Aasan tarike Bidhi

चश्मा लगाने का आसान तरीका, चश्मा लगाने का तरीका, चश्मा लगाने की स्टाइल, चश्मा लगाने के तरीके चश्मा लगाने का आसान तरीका बताइए या चश्मा लगाने की विधि आपने चश्मा उतार कर मेकअप किया और चश्मे के साथ बाहर निकल गई...फिर आपको अपने फैशन पर आत्मविश्वास नहीं रह जाता है। जब हमें चश्मा लग जाता है, तो कई बार हमारा मन इस बात से दुखी हो उठता है कि अब अपनी सुंदर आंखों को हमें चश्मे के पीछे छुपाना पड़ेगा। हताश न हों। विश्वप्रसिद्ध मेकअप गुरु कहती हैं कि चश्मा आपके चेहरे पर अटेंशन बढ़ाता है। हां, आपकी आंखें जरूर चश्मे के गुम हो सकती हैं, इसलिए सही ढंग से मेकअप करें, ताकि आप पहले से भी ज्यादा खूबसूरत दिखें। आखिर चश्मा आपके पूरे लुक का साथी है। आइए सीखें कैसा हो चश्मे के साथ मेकअप। आई शेडो का कमाल लोरियल पेरिस की मेकअप टीम की सुनें तो फ्रेमवाले चश्मे के नीचे लगाने वाले आई-शेडो जितने हल्के कलर के हों, उतना बेहतर है। आंखों के ऊपर न्यूट्रल, पीच या फिर लाइट शेड के शेडो अप्लाई करें, क्योंकि डार्क शेडो से आपकी आंखें थकी और अंदर धंसी हुई लगेंगी। अगर आपका चश्मा बिना फ्रेम का है, तो आप डार्क शेडो भी लगा सकती हैं। आ...

Silk Sadiyo Ka Dekhbhal Kaise Kare Ya Reshami Sadiyo Ki Dekhbhal Karane Ka Tarika

सिल्क साड़ियां या रेशमी साड़ियों की देखभाल करने की तरीका विधि  खूबसूरती अपनी जगह है। सिल्क की साड़ियां फैशन में सदाबहार बनी रहती हैं, तो इसकी एक वजह यह भी है कि ये साड़ियां महंगी होती हैं। लेकिन इन साड़ियों का ठीक से ख्याल न रखा जाए, तो इनकी रंगत फीकी पड़ जाती है। त्योहार हो या शादी, ड्रेस अप होने के लिए हर भारतीय महिला की पहली पसंद सिल्क की साड़ी ही होती है। साड़ी में महिलाओं की खूबसूरती निखरकर सामने आती हैं। यही कारण है कि ढेरों साड़ियां होने पर भी महिलाएं ट्रेंड के हिसाब से इन्हें खरीदती रहती हैं ताकि उनके वार्डरोब में एक से बढ़कर एक कलेक्शन शामिल हो सके। अगर इनकी सही देखभाल और रख-रखाव न किया जाए तो सिल्क, चंदेरी और बनारसी आदि महंगे फैब्रिक खराब होने का डर रहता है। सिल्क को सुरक्षित रखने के लिए उसे हमेशा मलमल के कपड़े में या फिर सूती कपड़े में लपेटकर रखें, साथ ही इनमें नमी की महक न आए, इसके लिए साड़ियों को थोड़ी देर के लिए धूप जरूर दिखाएं। सिल्क का मूल रंग बेज होता है, इसलिए उसको रंगीन बनाने के लिए उनपर रंग चढ़ाए जाते हैं, इसलिए इनके रंगों खासतौर पर नीले, मरून और हरे रंगों की चमक ...

bache bistar gila kyun karte hain | bache bistar gila kare to kya kare

बच्चे बिस्तर गीला करे तो क्या करें, या बच्चे बिस्तर गीला ना करे घरेलू उपाय? बच्चे की उम्र बढ़ने के बाद भी रात्रि में बिस्तर गीला हो जाए, तो माता-पिता के लिए यह चिंता का विषय हो जाता है... बचपन में अक्सर शिशु बिस्तर पर सूसू करते हैं। आमतौर पर पांच से छह वर्ष की उम्र तक आते-आते वे बिस्तर गीला करना बंद भी कर देते हैं। कई बार बच्चों का बिस्तर गीला करना चिंता का विषय बन जाता है, जब वे छह- सात वर्ष की आयु के बाद भी ऐसा करते हैं। शोध बताते हैं कि पांच साल से ज्यादा आयु के करीब 20 फीसदी बच्चे नींद में पेशाब करने की बीमारी से ग्रसित होते हैं। 10 साल से ज्यादा आयु के पांच फीसदी और 18 वर्ष से ज्यादा आयु के एक से दो फीसदी बच्चे बेड वेटिंग, यानी बिस्तर गीला करते हैं। अपने देश में 5 से 12 साल की आयु के लगभग 7.61-16.3 प्रतिशत बच्चे नींद में पेशाब करने से पीड़ित हैं। यह समस्या लड़किय के मुकाबले लड़कों में अधिक पाई जाती है। बेड वेटिंग है क्या? वस्तुतः विस्तर गीला करने की समस्या को दो वर्गों में बांटा जा सकता है- प्राइमरी बेड वैटिंग और सेकेंड्री बेड वेटिंग। प्राइमरी बेड वेटिंग में बच्चा शिशुपन से 5 वर्ष...