आंसू के बारे में जानकारी या आंसुओं के बारे में जानकारी बताइए आंसू दिल की जुबान हैं, आंसू दुखों की दास्तान हैं। आंसू आंख से टपकते हैं, तो मोती बन जाते हैं और नहीं टपकते तो खामोशी बन जाते हैं। आंसू अनमोल हैं, इन्हें बचाकर रखिए, लेकिन ठहरिए! कहीं ऐसा न हो कि इन्हें संभालते-संभालते ये ठहर जाएं या फिर सूख ही जाएं और जब खुशी में आपकी आंखें बरसना चाहें या फिर दुख भरे समय में आप रोना चाहें, तो रो भी न पाएं। हम सबने देखा है कि जब किसी के जीवन में अचानक कोई बड़ा दुख आ जाता है, तो सदमे में उसकी आंखों से आंसू नहीं टपकते। यह न रोना उसे अंदर ही अंदर घोंट देता है। तनाव और अवसाद का शिकार बना देता है। वैसे तो हर आंख में आंसू होते हैं और कोई नहीं चाहता कि उसके जीवन में ऐसे पल आएं, जब उसे रोना पड़े। मगर आज इन आंसुओं के मायने कुछ-कुछ बदल से गए हैं। आप हैरान हो सकती हैं कि कई मानसिक और शारीरिक बीमारियों में डॉक्टर आंसुओं की कीमत समझ रहे हैं। सदमा, अवसाद, एंग्जाइटी में तो मनोचिकित्सक दवाओं के साथ रोने की सलाह दे रहे हैं। विदेशों में और अब अपने यहां भी 'क्राइ रूम' बना रखे हैं। कई डॉक्टर अपने मरीजों क...
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