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corona thik hone ke baad kya kare

कोरोना वायरस ठीक होने के बाद क्या करे बड़ी संख्या में लोगों ने कोरोना संक्रमण को मात दी है, लेकिन संक्रमण से उबरने के बाद भी कुछ  हफ्तों तक सजग रहना जरूरी है... कोरोना संक्रमण से बचने हेतु सावधानियां पोस्ट कोविड केयर यानी कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद और कोविड-19 टेस्ट के निगेटिव आने के बाद भी रोगी की देखभाल बहुत जरूरी है। जब इस रोग के लक्षण एक महीने  से अधिक समय तक बने रहते हैं तो इन्हें पोस्ट  कोविड सिंड्रोम या क्रोनिक कोविड-19 की सूची में रखा जाता है। चिकित्सक के संपर्क में रहें : हर एक रोगी के ठीक होने की दर उसकी उम्र, संपूर्ण सेहत और खास रोगों जैसे डायबिटीज, रक्तचाप, दिल से जुड़े रोग यां कैंसर आदि पर निर्भर करती है। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती होने के दौरान या इलाज के बाद कई रोगियों को स्टेरॉयड दिए जाते हैं। इसलिए चिकित्सक के मार्गदर्शन में जरूर रहें। कितने दिनों तक है संक्रमण का असर: 12 से 14 दिन के बाद आपसे संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है और 17 दिन के बाद यह पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। जिन लोगों को कैंसर या एचआईवी जैसे रोग हैं या जो ऐसी दवाओं  का...

parkinson bimari ka ilaaj | lakshan | Upchar | Upay

पार्किंसन रोग का इलाज (Treatment), लक्षण (symptoms), उपचार, उपाय के बारे में जानकारी इन हिंदी डीप ब्रेन स्टिमुलेशन के प्रयोग से पार्किंसन रोग के तीव्र लक्षणों को नियंत्रित करने में मिल रही है मदद... मस्तिष्क का कार्य विभिन्न इंद्रियों द्वारा प्राप्त जानकारी का विश्लेषण करके शरीर को सुचारु रूप से संचालित करना है। इसके लिए मस्तिष्क शरीर में फैली अनगिनत तंत्रिकाओं के जाल में प्रवाहित विद्युत तरंगों के माध्यम से आवश्यक निर्देशों को पूरा करता है। जब मस्तिष्क में विकृति आती है तो यह विश्लेषण व शारीरिक संचालन अनियंत्रित हो जाता है। इसी का परिणाम होता है पार्किंसन रोग। यह रोग समय के साथ बढ़ता है और शरीर के संचालन को प्रभावित करता है। हल्के कंपन, मांसपेशियों की जकड़न और कड़ापन, शारीरिक गति का धीमा होना इस रोग के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। हालांकि यह बीमारी लाइलाज है पर दवाओं से इसे नियंत्रित करने में मदद मिलती है, लेकिन जब लक्षण तीव्र हो जाते हैं और दवाओं से आराम नहीं मिलता है तो डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) का प्रयोग पार्किंसन रोगियों के लिए बहुत प्रभावी विक...

गर्मी में त्वचा की देखभाल | गर्मी त्वचा की देखभाल

गर्मी त्वचा की देखभाल सूरज कि तेज रोशनी मे देर तक रहने से त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं खडी होने लगती है। लम्बे समय बाद घर से बाहर निकल रहे लोगों के लिये त्वचा का खास ध्यान रखना जरुरी है,,,,,, त्वचा पर गर्मी की मार कई तरह से पड़ती है। पर, इस बार लंबे समय बाद घर से बाहर निकल रहे लोगों में ये समस्याएं और ज्यादा बढ़ने की आशंका है। तापमान बढ़ने के साथ खुजली, दाने, त्वचा का लाल पड़ना, एलजी और सनबर्न के मामले बढ़ने भी लगे हैं। त्वचा के अलावा बालों पर भी धूल और धूप का असर बुरा पड़ता है। सूरज की यूवीए और यूवीबी किरणें बालों की बाहरी परत को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे बाल बेजान होकर टूटने लगते हैं। लगातार मास्क पहनने के कारण भी त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ी हैं। मास्क पहने के कारण ढके हुए हिस्से में पसीना जमा होने लगता है। त्वचा का तेल, पसीना और बैक्टीरिया, ये सब मिलकर त्वचाके रोमछिद्रों कोबंद कर देते हैं। इससे त्वचा परदाने निकलने लगते हैं। इन्हें 'मास्कने' का नाम दिया गया है। इसके अलावा, कई बार पहने हुए मास्क को पहनने से त्वचा का लचीलापन कम होने लगता है और रोमछिद्...

energy ke liye kya piye | energy ke liye kya pina chahiye

energy ke liye kya lena chahiye हमारे लिए रोज पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना जरूरी है। ऐसे पेय पदार्थ, जिनसे पोषण और ऊर्जा दोनों मिल सके। यं बाज़ार में कई तरह के एनर्जी ड्रिंक्स हैं, पर हम इन्हें घर में भी बना सकते हैं। पानी शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर करने में पानी से बेहतर कोई नहीं है। पानी के कारण ही किडनी विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम ढंग से कर पाती है। हम सादा, गुनगुना, कैसा भी पानी पी सकते हैं। हैं सुबह पिएं नारियल पानी इससे शरीर को तुरंत ऊर्जा, ठंडक और ताजगी मिलती है। इसके पोषक तत्व पोटैशियम, सोडियम और मैग्नीशियम, शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते। सुबह नारियल पानी पीने से शरीर को कई पोषक तत्व मिलते हैं। किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है। लिवर रोगों में नारियल पानी में नीबू मिलाकर ले सकते हैं। अदरक और नींबूकीचाय अदरक और नींबू का मिश्रण सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचाता है। इसे पीने से तुरंत ऊर्जा मिलती है और तनाव भी कम होता है। अदरक में प्रचुर मात्रा में -एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं और नीबू में विटामिन सी। इस चाय से...

फेक न्यूज़ कैसे पहचाने या फेक न्यूज़ कैसे चेक करें

फेक न्यूज़ कैसे पहचाने या फेक न्यूज़ कैसे चेक करें आज के दौर में सूचनाओं को बिना के जांचे-परखे एक-दूसरे के साथ साझा करना काफी खतरनाक हो सकता है। इंटरनेट मीडिया ने जहां सूचनाओं को साझा. करना बहुत आसान बना दिया है, वहीं इसका गलत उपयोग भी खूब हो रहा है। इंटरनेट मीडिया पर फर्जी खबरें तेजी से वायरल की जाती हैं। मगर आपको गलत सूचनाओं को साझा करने से बचना चाहिए। अगर कुछ बातों का ध्यान रखें, तो आप भी फर्जी खबर, वीडियो आदि को पहचान सकते हैं.... आगे भेजने से पहले सोचें : आमतौर पर लोगों की आदत होती है कि वे इंटरनेट मीडिया यानी वाट्सएप, फेसबुकं आदि पर आई किसी भी खबर, फोटो या वीडियो को बिना सोचे-समझे एक-दूसरे के साथ साझा करने लगते हैं। लोग यह भी ध्यान नहीं देते कि जो वे साझा कर रहे हैं, वह सही है भी या नहीं और उसका क्या प्रभाव हो सकता है। जब भी इंटरनेट मीडिया पर किसी मजेदार खबर या जरूरी सलाह के नाम पर मैसेज आए, तो उसे तुरंत शेयर करने से बचें। थोड़ा रुकें और सोचें कि क्या वह खबर सच है या क्या उसे भेजना जरूरी है? इससे आप फेक न्यूज को साझा करने से बच जाएंगे। खासकर आपको ...

कैंसर बीमारी का इलाज क्या है | उपचार | इलाज | ट्रीटमेंट

कैंसर ठीक कैसे होता है, उपचार,  उपाय,  ट्रीटमेंट,  इलाज के बारे में आजादी के समय लाइलाजकहे जाने वाले कैंसर की रोकथाम में नई तकनीकों व दवाओं ने लादी है क्रांति... भारत 1947 में आजाद हुआ परंतु यह बड़ी समस्या थी कि आखिर देश का समेकित विकास कैसे किया जाए। कई संक्रामक बीमारियों के साथ ही टीबी और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां उपयुक्त उपचार के अभाव में बड़ी चुनौती थीं। चिकित्सा संसाधनों की कमी और जागरूकता न होने के कारण कई बार कैंसर जैसी बीमारी के बारे में लोग जान ही नहीं पाते थे। आजादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में यह जानना सुखद है कि चिकित्सा जगत ने इस बीमारी की रोकथाम की कई तकनीकें व दवाएं विकसित की हैं और इस दिशा में निरंतर शोधकार्य जारी हैं। कैंसर एक जटिल बीमारी है, लेकिन यदि समय पर इसके संक्रमण का पता चल जाए और उपचार के लिए वक्त मिले तो स्वस्थ होने की काफी संभावना बढ़ जाती है। समय के साथ चिकित्सा के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति हुई और इस बीमारी पर भी बहुत काम हुआ। 1975 में नेशनल कैंसर कंट्रोल प्रोग्राम संचालित हुआ जिसके तहत रीजनल कैंसर सेंटर्स बनान...

अर्थराइटिस के लक्षण और उपचार | इलाज | उपाय | बचाव

अर्थराइटिस बीमारी के लक्षण (Symptoms) और उपचार के बारे में अर्थराइटिस से बचाव आपके हाथ में है। इससे ग्रसित होन पर तुरंत जांच और समय रहते उपचार कराने के पश्चात जिया जा सकता है सामान्य जीवन... arthritis-ke-lakshan-aur-upchar विश्वभर में अर्थराइटिस (गठिया) सबसे सामान् स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इस बीमारी के प्रत लोगों में उतनी जागरूकता नहीं है, जितनी हृदय रोगो या डायबिटीज को लेकर है। लोगों को अर्थराइटिस के बारे में जागरूक करने, बचाव के उपाय और उपचार के विकल्पो के बारे में जानकारी देने के लिए हर साल 12 अक्टूबर को 'वर्ल्ड अर्थराइटिस डे' मनाया जाता है। अर्थराइटिस से बचाव भी आपके हाथ में है और इससे ग्रसित होने पर तुरंत जांच और समय रहते उपचार कराने के पश्चात सामान्य जीवन जीना भी। अर्थराइटिस जोड़ों से संबंधित एक स्वास्थ्य समस्या है। इसमें जोड़ों में सूजन आ जाती है, तेज दर्द व जलन के साथ उन्हें हिलाने-डुलाने में भी तकलीफ होती है। अर्थराइटिस किसी को किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसके मामले अधिक देखे जाते हैं। बदली जीवनशैली, खानपान की गलत आदतें, ...