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cbse board exam ki taiyari kaise kare tips in hindi

CBSE बोर्ड एग्जाम की तैयारी कैसे करें या बोर्ड एग्जाम की तैयारी कैसे करनी चाहिए एग्जाम का तैयारी कैसे करें? अब जब दो साल बाद फिर से सीबीएसई बोर्ड की आफलाइन परीक्षाएं होने को हैं, तो ऐसे में जरूरी है कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से चुस्त- दुरुस्त रहें। पढ़ाई के साथ-साथ अपनी जीवनशैली को भी सही रखना आप सभी के लिए आवश्यक है। आप सक्षम हैं। कर सकते हैं, तो अब अपने प्रयास बढ़ाकर कहना होगा कि इन परीक्षाओं के लिए हैं तैयार हम.... Cbse board की आफलाइन परीक्षाओं की तारीखें घोषित होने पर आप कुछ परेशान तो नहीं हैं? ऐसा हो सकता है, क्योंकि आपकी आदत आनलाइन पढ़ाई करने की जो हो गई है। दूसरे, वार्षिक परीक्षा की अच्छी तैयारी करना भी आसान नहीं है। इसके लिए जमकर पढ़ना होता है। शरीर और मस्तिष्क, दोनों अगर आपका बेहतर साथ देंगे, तभी आप ऐसा कर पाएंगे। फिर खुशी-खुशी परीक्षा भवन में प्रश्नों के उत्तर अच्छी तरह से लिख सकेंगे। तन की ऊर्जा महत्वपूर्ण:       अगर आपका शरीर थका-थका सा रहता है, पढ़ाई के लिए देर तक बैठने की हिम्मत नहीं होती तो पढ़ने या दोहराने में पीछे हो जाने का तनाव महसूस करने ल...

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण और इलाज | कारण | रोकथाम | इलाज | उपाय | उपचार बारे में

ब्रेन ट्यूमर होने के कारण, लक्षण, रोकथाम व इलाज के बारे में जानकारी लाइलाज नहीं है ब्रेन ट्यूमर सटीक पहचान और समुचित इलाज से दी जा सकती है इसे मात... ब्रेन ट्यूमर होने के लक्षण क्या है? जब ब्रेन (मस्तिष्क) में ट्यूमर विकसित होने लगता है तो शरीर कुछ संकेत देता है। यदि हम इन संकेतों को पहचान लें और समय रहते उपचार शुरू हो जाए तो संभावित खतरों को टाला जा सकता है। अगर लगातार सिरदर्द रहने लगे, सुबह-सुबह इतना तेज सिरदर्द हो कि नींद खुल जाए, जी मिचलाए, अचानक देखने, सुनने व बोलने में परेशानी होने लगे तो इसे सामान्य समस्या मानकर अनदेखी न करें। ये ब्रेन ट्यूमर के प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में पीड़ित को तत्काल न्यूरोलाजिस्ट को दिखाना चाहिए। यदि जांच में ब्रेन ट्यूमर की पुष्टि होती है तो उपचार से इसे ठीक किया जा सकता है। ट्यूमर बीमारी क्या है? जब सामान्य कोशिकाएं असामान्य रूप से विकसित होकर गुच्छे का रूप ले लेती हैं तो उसे ट्यूमर कहते हैं। ट्यूमर कैंसर से ग्रसित व बिना कैंसर वाला हो सकता है। ब्रेन ट्यूमर के अधिकतर मामलों में तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली गंभीर रूप से प्रभावित ह...

irritable bowel syndrome kya hota hai | lakshan | Ilaj | Upchar

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के बारे में जानकारी खानपान की गलत आदतें व असंयमित दिनचर्या बनती है इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का कारण, उपचार और परहेज से इसे किया जा सकता है दूर... आपको इस blog में यह टॉपिक मिलेगा - इरिटेबल बाउल सिंड्रोम क्या होता है? इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के लक्षण इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का उपचार इरिटेबल बाउल सिंड्रोम क्या होता है? पेट साफ न होना, कुछ खाते ही शौच के लिए जाना, कब्ज, सिरदर्द और थकान होना। यदि इस  तरह की समस्या है तो घबराएं नहीं, यह इरिटेबल  बाउल सिंड्रोम (आइबीएस) के कारण हो सकता है। यह पाचनतंत्र से जुड़ी एक आम समस्या है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम एक डिसआर्डर है, जिसका असर बड़ी आंत पर पड़ता है। इससे बड़ी  आंत अधिक संवेदनशील हो जाती है और इसकी गतिविधियों में असंतुलन पैदा हो जाता है। इससे भोजन का प्रवाह और पाचनतंत्र प्रभावित होता है। जब आंत अपना कार्य तेज करती है तो डायरिया की स्थिति और जब यह प्रक्रिया धीमी होती है तो कब्ज की परेशानी होती है।  शोधों के अनुसार, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम का कारण गलत खानपान, तनाव और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का प्रभावित होना ...

stan cancer ke lakshan | upchar | ilaj | karan

ब्रेस्ट कैंसर लक्षण(Symptoms) व बचाव के तरीके, उपचार (Treatment)  इन हिंदी में जानकारी यदि सही पहचान और समय पर मिले उपचार तो लाइलाज नहीं है स्तन कैसर जानते है इसके कारण, लक्षण और उपचार के बारे में......... ब्रेस्ट कैंसर के बारे में जानकारी जब शरीर की कोशिकाओं में अनियंत्रित विभाजन होता है तो ये आसामान्य कोशिकाएं एक जगह एकत्र होकर ट्यूमर बना देती हैं। यह एक उभार या गांठ के रूप में नजर आता है। यदि शुरुआत में इसकी पहचान हो जाए और उपचार किया जाए तो यह पूरी तरह ठीक हो सकता है, लेकिन चौथी स्टेज पर पहुंचने पर इसका उपचार संभव नहीं है, इसलिए इस संबंध में जागरूकता बेहद आवश्यक है। स्तन कैंसर के प्रमुख कारण स्तन कैंसर कई बार आनुवांशिक वजहों से होता है, पर इसकी कई और वजह भी होती हैं, जिन्हें समझना जरूरी है जैसे धूमपान व अल्कोहल का सेवन, मोटापा, स्तनपान न कराना, हार्मोनल थेरेपी में दी जाने वाली दवाएं, अधिक उम्र में शादी और गर्भधारण, अनियमित जीवनशैली, लंबे समय तक गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन इत्यादि। इन परिस्थितियों से यथासंभव दूरी बनाने का प्रयास कर सकती हैं। स्तन कैंसर के प्रमुख लक्षण स्तन म...

corona thik hone ke baad kya kare

कोरोना वायरस ठीक होने के बाद क्या करे बड़ी संख्या में लोगों ने कोरोना संक्रमण को मात दी है, लेकिन संक्रमण से उबरने के बाद भी कुछ  हफ्तों तक सजग रहना जरूरी है... कोरोना संक्रमण से बचने हेतु सावधानियां पोस्ट कोविड केयर यानी कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद और कोविड-19 टेस्ट के निगेटिव आने के बाद भी रोगी की देखभाल बहुत जरूरी है। जब इस रोग के लक्षण एक महीने  से अधिक समय तक बने रहते हैं तो इन्हें पोस्ट  कोविड सिंड्रोम या क्रोनिक कोविड-19 की सूची में रखा जाता है। चिकित्सक के संपर्क में रहें : हर एक रोगी के ठीक होने की दर उसकी उम्र, संपूर्ण सेहत और खास रोगों जैसे डायबिटीज, रक्तचाप, दिल से जुड़े रोग यां कैंसर आदि पर निर्भर करती है। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती होने के दौरान या इलाज के बाद कई रोगियों को स्टेरॉयड दिए जाते हैं। इसलिए चिकित्सक के मार्गदर्शन में जरूर रहें। कितने दिनों तक है संक्रमण का असर: 12 से 14 दिन के बाद आपसे संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है और 17 दिन के बाद यह पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। जिन लोगों को कैंसर या एचआईवी जैसे रोग हैं या जो ऐसी दवाओं  का...

parkinson bimari ka ilaaj | lakshan | Upchar | Upay

पार्किंसन रोग का इलाज (Treatment), लक्षण (symptoms), उपचार, उपाय के बारे में जानकारी इन हिंदी डीप ब्रेन स्टिमुलेशन के प्रयोग से पार्किंसन रोग के तीव्र लक्षणों को नियंत्रित करने में मिल रही है मदद... मस्तिष्क का कार्य विभिन्न इंद्रियों द्वारा प्राप्त जानकारी का विश्लेषण करके शरीर को सुचारु रूप से संचालित करना है। इसके लिए मस्तिष्क शरीर में फैली अनगिनत तंत्रिकाओं के जाल में प्रवाहित विद्युत तरंगों के माध्यम से आवश्यक निर्देशों को पूरा करता है। जब मस्तिष्क में विकृति आती है तो यह विश्लेषण व शारीरिक संचालन अनियंत्रित हो जाता है। इसी का परिणाम होता है पार्किंसन रोग। यह रोग समय के साथ बढ़ता है और शरीर के संचालन को प्रभावित करता है। हल्के कंपन, मांसपेशियों की जकड़न और कड़ापन, शारीरिक गति का धीमा होना इस रोग के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। हालांकि यह बीमारी लाइलाज है पर दवाओं से इसे नियंत्रित करने में मदद मिलती है, लेकिन जब लक्षण तीव्र हो जाते हैं और दवाओं से आराम नहीं मिलता है तो डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) का प्रयोग पार्किंसन रोगियों के लिए बहुत प्रभावी विक...

गर्मी में त्वचा की देखभाल | गर्मी त्वचा की देखभाल

गर्मी त्वचा की देखभाल सूरज कि तेज रोशनी मे देर तक रहने से त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं खडी होने लगती है। लम्बे समय बाद घर से बाहर निकल रहे लोगों के लिये त्वचा का खास ध्यान रखना जरुरी है,,,,,, त्वचा पर गर्मी की मार कई तरह से पड़ती है। पर, इस बार लंबे समय बाद घर से बाहर निकल रहे लोगों में ये समस्याएं और ज्यादा बढ़ने की आशंका है। तापमान बढ़ने के साथ खुजली, दाने, त्वचा का लाल पड़ना, एलजी और सनबर्न के मामले बढ़ने भी लगे हैं। त्वचा के अलावा बालों पर भी धूल और धूप का असर बुरा पड़ता है। सूरज की यूवीए और यूवीबी किरणें बालों की बाहरी परत को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे बाल बेजान होकर टूटने लगते हैं। लगातार मास्क पहनने के कारण भी त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ी हैं। मास्क पहने के कारण ढके हुए हिस्से में पसीना जमा होने लगता है। त्वचा का तेल, पसीना और बैक्टीरिया, ये सब मिलकर त्वचाके रोमछिद्रों कोबंद कर देते हैं। इससे त्वचा परदाने निकलने लगते हैं। इन्हें 'मास्कने' का नाम दिया गया है। इसके अलावा, कई बार पहने हुए मास्क को पहनने से त्वचा का लचीलापन कम होने लगता है और रोमछिद्...